दुनिया की 7 सबसे बड़ी त्रासदी | प्रकति हर 400 सालो में लेती है बदला

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नमस्कार दोस्तों स्वागत है आप का काम की बात में और इस विडियो में हम आपको बताएँगे की कैसे

बेहद तेजी से फैले कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में खौफ का माहौल पैदा कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने
इसे एक वैश्विक महामारी घोषित किया है और अगर दुनिया इस समय पर्याप्त सावधानी नहीं बरतती तो स्थिति बेहद बुरी हो सकती है।

लेकिन ये पहली महामारी नहीं है, और दुनिया पहले भी इससे कई घातक बीमारियों का सामना कर चुकी है।
इसे संयोग कहें या कुछ और…पर कुछ सेकड़ो सालो में पूरी दुनिया में एक बड़ी महामारी का हमला होता है. जैसे अभी कोरोना वायरस फैला हुआ है. महामारी फैलती चली जाती है. लोगों की मौत होती रहती है. और हर बार इंसानों को नई महामारी की दवाइयां खोजनी पड़ती हैं. ऐसा पिछले हजारो सालों से होता आ रहा है.

आइए जानते हैं हजारो सालो में किन-किन महामारियों ने कितने लोगों को मारा है|

पहली बार साल 165 में गेलेने के प्लेग के नाम की इस बीमारी ने तत्कालीन एशिया, मिस्र, यूनान (ग्रीस) और इटली को सबसे अधिक प्रभावित किया. जन्हा इसने 50 लाख लोगों को अपना शिकार बनाया था| कई लोगों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण चेचक या स्मॉलपॉक्स था. लेकिन इस बारे कोई भी पक्की जानकारी किसी के पास नहीं है |

जस्टिनियन प्लेग :- साल 541

साल 541 में फैले जस्टिनियन प्लेग को इतिहास की दूसरी सबसे घातक महामारी माना जाता है।
मिस्र से फैलनी शुरु होने वाली इस बीमारी ने धीरे-धीरे भूमध्य सागर के आसपास के पूरे इलाके और यूनानी साम्राज्य को अपनी चपेट में ले लिया था
अगली दो सदी तक ये बीमारी आती-जाती रही और इससे लगभग पांच करोड़ लोगों की मौत हुई जो उस समय की वैश्विक जनसंख्या का 26 प्रतिशत था।
माना जाता है कि इस बीमारी ने यूरोप की आधी आबादी को साफ कर दिया था. इसका सबसे अधिक प्रभाव बिजेटिनियन साम्राज्य और मेडिटेरिनियन पोर्ट पर पड़ा था इसकी शुरुआत कहां से हुई, इसका आज तक कुछ पता नहीं चला है |

इससे पूरी दुनिया प्रभावित रही| इसने पूर्वी मेडिटेरिनियन और कॉन्स्टेंटिनोपल शहर की तो 40 फीसदी आबादी को हमेशा के लिए सुला दिया. इससे औसतर 5,000 लोग रोज मरा करते थे.

द ब्लैक डेथ’ 1346

14वीं सदी में फैली ‘द ब्लैक डेथ’ महामारी से सिर्फ यूरोप में ही दो करोड़ लोगों की मौत हो गई थी} ऐसा कहा जाता है की ये बीमारी एशिया से फैलना शुरू हुई थी और अक्टूबर 1347 में इटली के मेसीना बंदरगाह पर आए 12 जहाजों के साथ यूरोप में पहुंची।
इन जहाजों में ज्यादातर लोग मृत पाए गए और जो जिंदा थे, वे बेहद बीमार थे। जहाजों को तत्काल वापस भेज दिया गया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और बीमारी धीरे-धीरे पूरे यूरोप में फैल चुकी थी | बताया जाता है कि इससे कुल 7.5 करोड़ से 20 करोड़ लोग मारे गए|यानी यूरोप में कुल आबादी की 30–60% लोगों की मौत
प्लेग चूहों से फैलता है और फिर कीड़ों के जरिए मनुष्य इससे संक्रमित होता है. यह जहाजों के जरिए पूरी दुनिया तक पहुंचा. इसका मुख्य स्रोत पोत बने, जहां चूहों के पनपना आम बात है. इस तरह इसे रोक पाना काफी कठिन हो गया था. ब्लैक डेथ उस समय की आई हुई सबसे खतरनाक बीमारी थी। जिसका इलाज उस समय नामुमकिन था।

ग्रेट प्लेग ऑफ मार्सिले :- साल 1720

1720 में पूरी दुनिया में प्लेग फैला था. इसे ग्रेट प्लेग ऑफ मार्सिले कहा जाता है. मार्सिले फ्रांस का एक शहर है. ये पेंटिंग देख रहे है ये पेटिंग एक कलाकार जिनका नाम मिशेल सेरे है उनकी बनाई हुई है . इसमें उन्होंने दिखाने की कोशिश की है कि कैसे प्लेग ने कितने लोगों को मारा था|

मार्सिले में फैले प्लेग की वजह से फ्रांस में 1 लाख लोगों की मौत हुई थी. प्लेग के फैलते ही कुछ महीनों में 50 हजार लोग मारे गए थे और बाकी 50 हजार लोग अगले दो सालों में मारे गए |

कॉलेरा 1820

फिर इसके 100 साल बाद यानी 1820 में एशियाई देशों में कॉलेरा ने महामारी ने रूप लिया. इस महामारी ने जापान, फारस की खाड़ी के देश, भारत, बैंकॉक, मनीला, जावा, ओमान, चीन, मॉरिशस, सीरिया आदि देशों को अपनी जकड़ में लिया|
कॉलेरा की वजह से इंडोनेशिया के जावा द्वीप में 1 लाख लोगों की मौत हुई थी. सबसे ज्यादा मौतें थाईलैंड, इंडोनेशिया और फिलीपींस में हुई थी|

तीसरी प्लेग महामारी’ 1855

1855 में फैली ‘तीसरी प्लेग महामारी’ दुनिया के इतिहास की पांचवीं सबसे घातक बीमारी साबित हुई है।
ये प्लेग चीन से फैलना शुरू हुआ और जल्द ही भारत और हांगकांग में पहुंच गया। भारत में इस वायरस के कारण सबसे अधिक मौतें हुईं और इसे लेकर अंग्रजों को विरोध का सामना भी करना पड़ा। पूरी दुनिया में इससे लगभग 1.5 करोड़ लोगों की मौत हुई।
ये बीमारी 1960 तक सक्रिय रही जब इसके मामले 100 से कम हो गए।

तीसरी श्रेणी का हैजा (साल 1852-1860)

हैजा की सात श्रेणियों में से इसे सबसे अधिक जानलेवा माना जाता है. इस रोग की शुरुआत 19वीं सदी में हुई थी. मगर इसका प्रकोप साल 1852 से 1860 के दौरान सबसे अधिक रहा. इसकी शुरुआत भारत से हुई और फिर यह एशिया, यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका तक फैल गया.
इसने 10 लाख लोगों की जान ली. ब्रिटिश डॉक्टर जॉन स्नो ने इसकी पहचान की. उन्होंने पता लगाया कि खराब पानी इसकी सबसे बड़ी वजहथी. हालांकि, साल 1854 में इस बीमारी ने ब्रिटेन में 23,000 लोगों को मौत के घाट उतारा.

स्पैनिश फ्लू 1920

इसके 100 साल बाद 1920 में स्पैनिश फ्लू फैला. वैसे तो ये फैला 1918 से ही था, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर 1920 में देखने को मिला.
कहा जाता है कि इस फ्लू की वजह से पूरी दुनिया में 1.70 करोड़ से 5 करोड़ के बीच लोग मारे गए थे| पहले विश्व युद्ध के दौरान किसी सैन्य कैंप से ये बीमारी शुरू हुई थी और युद्ध खत्म होने के बाद अपने-अपने देश लौटने वाले सैनिकों ने इस बीमारी को पूरी दुनिया में फैला दिया।
ज्यादातर संक्रमितों के मरने या उनमें बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता पैदा होने के कारण ये बीमारी 1919 में खत्म हो

HIV-AIDS 1920

भले ही हमें AIDS से बड़ी संख्या में मृत्यु की खबरें बेहद कम मिलती हो, लेकिन ये इतिहास की तीसरी सबसे घातक महामारी साबित हुई है।
1981 में पहचाने जाने के बाद से लगभग 3.5 करोड़ लोग AIDS का शिकार हो चुके हैं।
AIDS का वायरस HIV संक्रमित शख्स की प्रतिरोधक क्षमता को पूरी तरह से नष्ट कर देता है और वो सामान्य बीमारियों से लड़ने के काबिल भी नहीं रह पाता।
अभी तक इसकी कोई भी वैक्सीन नहीं बन सकी है।

AIDS को पहली बार भले ही अमेरिका के समलैंगिक समुदाय में पाया गया हो, लेकिन माना जाता है कि ये 1920 के दशक में पश्चिम अफ्रीका के किसी चिम्पैंजी से निकला था। ये केवल शरीर के कुछ तरल पदार्थों के जरिए ही फैलता है।

इसके बाद बहोत बड़े स्तर पर अलग अलग देशो में महामारिया फैलती रही और हजारो लोगो की मौते भी हुई लेकिन उन महामारियो पर जल्दी ही काबू प् लिया गया
लेकिन

2020 में चीन से शुरुआत हुई कोरोनावायरस की इस बीमारी ने दुनिया भर में अब तक 195 देशों में 472,029 लोगों को संक्रमित किया, जिसमे दुनिया भर में 21,297 लोगो की मौत हुई | सबसे ज्यादा मौते इटली china स्पेन, फ्रांस और ईरान में हुई है |

यह महज संयोग नहीं है लकिन पिछली चार महामारियों में से तीन महामारियों का मूल स्तोर्त् चीन रहा है।

हमें यह नहीं पता कि अगली महामारी कब और कहां होगी, लेकिन हम जानते हैं कि यह कैसे होगी। न्यूयॉर्क स्थित गैर लाभकारी संगठन ईकोहेल्थ अलायंस में साइंस एवं आउटरीच के उपाध्यक्ष जोनाथन एप्सटीन ने एक वेबसाइट डाउन टू अर्थ के इंटरव्यू में बताया की अगली महामारी जूनोटिक बीमारी होगी।” जूनोटिक बीमारीयां जानवरों से मनुष्यों को होने वाले संक्रामक रोग हैं। जल पक्षी (वाटरफाउल) फ्लू वैश्विक महामारी के वाहक होंगे जबकि चमगादड़ या कुतरने वाले जीव जैसे चूहा, गिलहरी कोरोनावायरस के स्रोत होंगे। एप्सटीन कहा की पिछले 15 वर्षों में हमने चीन और दुनिया के तमाम हिस्सों में चमगादड़ों में सार्स से संबंधित दर्जनों कोरोनावायरस पाए हैं। हमारे शोध से पता चला है कि चीन में लोग चमगादड़ का शिकार करते हैं उन्हें खाते है जिन्हें सार्स और नए कोरोनावायरस से जुड़े वायरस फैलाने के लिए जाना जाता है। इनके संपर्क में आने वालों ने पहले इन वायरस के प्रति एंटीबॉडी विकसित कर लि है, जिसका अर्थ है की ये बीमारी को फैला सकते हैं।” अब कोरोना के बाद डरे हुए लोग मांसाहार से परहेज कर रहे हैं.

दोस्तों ये आपको तय करना है आपको अपना रहन सहन कैसा रखना और ख़ास तोर पर अपना खाना पीना

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