AMIT SHAH BIOGRAPHY, अमित शाह जीवनी | हिंदी

0
1981

अमित शाह जी का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को महाराष्ट्र के मुंबई में पाटण जिले के चँन्दूर गाँव में एक गुजराती परिवार में हुआ था। उनके पिता अनिल चंद्र शाह है जोकि एक पीवीसी पाइपस का व्यवसाय करते थे | उनकी और उनकी माता का नाम कुसुमबेन शाह है | इनकी 6 बहने है जिनमे से २ बहने शिकागो में रहती है | सोलह वर्ष की आयु तक वह अपने पैत्रक गांव मान्सा, गुजरात में ही रहे और वहीँ अपनी शुरूआती शिक्षा पूरी की और इसी बिच जब वे वह 14 वर्ष के थे तभी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हो गए। स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात उनका परिवार अहमदाबाद चला गया और यही इन्होने सीयू शाह साइंस कॉलेज से बायो केमिस्ट्री में बीएससी की डिग्री प्राप्त की और इसके बाद अपने पिता के बिज़नस में हाथ बटाने लगे | और साथ ही साथ अमित शाह ने अहमदाबाद के सहकारी बैंकों में स्टॉकब्रोकर का भी काम किया।

1983 में कॉलेज के दिनों में ही आरएसएस की विद्यार्थी शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से जुड़ गए और कॉलेज के दिनों में ही अमित शाह की मुलाकात नरेन्द्र मोदी जी से हुयी थी | इसके बाद अमित शाह 1984-85 में बीजेपी के सदस्य बने | भाजपा सदस्य बनने के बाद उन्हें अहमदाबाद के नारायणपुर वार्ड में पोल एजेंट का पहला दायित्वा सौंपा गया, तत्पश्चात् वह उसी वार्ड के सचिव बनाए गए| इसके बाद वर्ष 1987 में वे बीजेपी में शामिल हुए यानी मोदी जी के शामिल होने से 1 साल पहले | इसी वर्ष इन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का सदस्य बनाया गया | इनके काम को देखते हुए इन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा में अनेक पदों जैसे वार्ड सचिव, तालुका सचिव, राज्य सचिव, उपाध्यक्ष और महासचिव पर पदोन्नत किया गया | दिसम्बर 1987 में उनकी शादी महारास्ट् के कोहलापुर की सोनल शाह से हुई जिनके पिता संघ के सदस्य थे

1991 में, उन्होंने लाल कृष्ण आडवाणी जी के लिए गांधीनगर संसदीय क्षेत्र में उन्होंने चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाला| और यंहा अडवाणी जी की भारी मतों से जित हुई | इसके बाद इन्होने 1997 में अटल बिहारी वाजपयी जी ने गुजरात में चुनाव लड़ा जिसका चुनाव प्रचार भी अमित शाह ने ही संभाला और यंहा भी अटल जी की भारी मतों से जित हुई |

1997 में ही अमित शाह जी ने भी गुजरात सरखेज विधानसभा सीट से उप चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की| इसी निर्वाचन क्षेत्र से चार बार क्रमश: 1997 (उप चुनाव), 1998, 2002 और 2007 से विधायक निर्वाचित हो चुके हैं।

1995 में बीजेपी ने गुजरात में पहली बार अपनी सरकार बनाई परन्तु सरकार 1997 में गिर गई। किन्तु उस अल्पावधि में ही अमित भाई ने गुजरात प्रदेश वित्त निगम के अध्यक्ष के रूप में निगम का कायापलट कर दिया और उसे स्टॉक एक्सचेंज में भी सूचीबद्ध करवाने का महत्वपूर्ण काम किया।

इसके बाद फरवरी 1997 में उपचुनाव जीतकर ये विधायक बने और साल 1998 में उन्होंने वही सीट पुनः 1.30 लाख मतों के अंतर से जीते और अपनी सीट बरकरार रखी|

इसके बाद 1999 में वे अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक (एडीसीबी) के प्रेसिडेंट चुने गए | एडीसीबी उस समय गंभीर परिस्थिति में था और बैंक को 36 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था और ये बैंक बंद होने की कगार पर था। लेकिन अमित शाह ने एक साल के भीतर ही अगले वर्ष 27 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया।

इसके बाद 2001 में अमित शाह को भाजपा के सहकारिता प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया । 2002 में नरेंद्र मोदी की सरकार गुजरात में आई और इस बार भी अमित भाई ने सरखेज से लगातार तीसरी बार चुनाव जीता। इस बार जीत का अंतर बढ़ कर 1,58,036 हो गया

2002 के चुनावों में जीतने के बाद, वह मोदी सरकार में सबसे कम उम्र के गृहमंत्री बने, और उन्हें कई बार विभाग दिए गए। एक समय में, तो ऐसा आया जिसमे उन्हें गृह मंत्रालय , कानून और न्याय विभाग , जेल, सीमा सुरक्षा, नागरिक सुरक्षा, उत्पाद शुल्क, परिवहन, निषेध, होमगार्ड, ग्राम रक्षक दल, पुलिस आवास और विधायी और संसदीय मामलों के विभाग जैसे 12 विभागों का उतरदायित्व दिया गया |

अमित शाह ने गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट पारित करने के लिए अपनी सरकार को समझाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई| उनके इन प्रयासों को देखते हुए आरएसएस के वरिष्ठ नेता अमित शाह से काफी प्रभावित हुए थे | यदि आप गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट के बारे जानना चाहते है तो हमारी वेबसाइट काम्किबात.इन पर जाए लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा |

15 जून, 2004 में मुंबई की 19 वर्षीय इशरत जहां, उसका दोस्त जावेद एलियास प्रनेश और पाक नागरिक जीशान जौहर के साथ अमजद अली, डी.जी. वंजारा की टीम द्वारा एक मुठभेड़ में मारे गये थे। इशरत जहां और उसके साथियों को तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी की हत्या करने के मिशन पर आने वाले आतंकी बताया गया था। बाद में सीबीआई ने अपनी जांच में इसे फर्जी मुठभेड़ बताया था। और सीबीआई ने रिपोर्ट में कहा की अमित शाह के कहने पर इशरत जहां, और उसके साथियो का फर्जी इन्कोउन्टर किया गया था | वहीं डीजी वंजारा के वकील ने कोर्ट में दावा किया कि वंजारा के खिलाफ चार्जशीट मनगढ़ंत हैं और पूर्व पुलिस अधिकारी के खिलाफ वाद दायर करने लायक सबूत पर्याप्त नहीं हैं।

और 07 मई 2014 को सीबीआई ने ही अमित शाह को इशरत जहां मुठभेड़ मामले में क्‍लीन चिट दे दी है. जांच एजेंसी ने कहा है कि इस मामले में अमित शाह के खिलाफ कोई पर्याप्त सबूत नहीं मिला है|

इसी मुद्दे पर गुजरात सरकार के प्रवक्‍ता जयनारायण व्‍यास ने अमित शाह पर लगे आरोपों पर कहा, ‘यह कांग्रेस की एक चाल थी जिसमें वो सफल नहीं हो पाए. अमित शाह के खिलाफ जब कुछ भी है ही नहीं तो जांच में कहां से कुछ मिलेगा. हम जो शुरू से कह रहे थे कि अमित शाह पर लगाए गए आरोप में दम नहीं है वो सही निकला.’

इसके बाद अमित शाह के नेतृत्‍व में 2005 में गुजरात पुलिस ने आपराधिक छवि वाले सोहराबुद्दीन शेख का एन्काउंटर किया गया | और बाद में इस केस की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई का आरोप था कि शाह के इशारे पर ही फर्जी मुठभेड़ का नाटक रचा गया। और बाद में सोहराबुद्दीन शेख की पत्‍नी तथा इस केस के प्रमुख गवाह तुलसी प्रजापति की भी हत्‍या कर दी गई थी।

इसी के चलते 25 जुलाई 2015 को अमित शाह को गिरफ्तार किया गया और करीब नब्बे दिन जेल में रहने के बाद उन्हें ज़मानत पर 29 अक्टूबर 2010 को छोड़ा गया | लेकिन एक याचिका को स्वीकार करते हुए जस्टिस आफताब आलम ने 2010 से 2012 तक के लिए अमित शाह को गुजरात में आने से मना कर दिया |

दरअसल 1995 में ही सोहराबुद्दीन शेख को गुप्त रूप से बड़ी संख्या में हथियार रखने को लेकर गिरफ्तार किया गया था। फिर उसे 1997 में आपराधिक मामलो में फिर गिरफ्तार किया गया और इसके बाद 2002 से 2003 के बीच सोहराबुद्दीन शेख-तुलसीराम प्रजापति और मोहमंद आजम ने एक गेंग बनाया था ये गैंग उदयपुर अहमदाबाद और उजैन के मार्बल व्यापारियों और फैक्ट्री मालिको से उगाही करते थे | और अमित शाह पर आरोप लगाया गया की इन्ही व्यापारियों ने इन गैंगस्टर तो मारने के लिए अमित शाह को सुपारी दी थी |

तब अमित शाह ने कहा था की कांग्रेस सीबीआई पर दवाब बनाकर मेरे पीछे लगाया जा रहा है और इसकी पुष्टि 2010, में पुलिस कमिश्नर गीता जौहरी, ने की जो पहले इस मामले की जांच कर रही थी , गीता जोहरी ने बताया की सीबीआई सोहराबुद्दीन मामले में अमित शाह को झूठा फंसाने के लिए हम पर दबाव डाल रही थी|

और Dec 2018 स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने कहा कि सोहराबुद्दीन शेख-तुलसीराम प्रजापति की हत्या एक साजिश के तहत नहीं हुई। क्युकी साजिश और हत्या साबित करने के लिए मौजूद सभी गवाह और प्रमाण संतोषजनक नहीं हैं और परिस्थिति संबंधी साक्ष्य भी पर्याप्त नहीं है। इसीलिए सीबीआई की विशेष अदालत ने अमित शाह समेत सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया|

2013 में, अमित शाह पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने 2009 में एक महिला पर गुजरात के गृह मंत्री के रूप में अवैध निगरानी का आदेश दिया था। कोबरापोस्ट और गुलेल वेबसाइटों ने अमित शाह और पुलिस अधिकारी जीएल सिंघल के बीच टेप की गई ऑडियो बातचीत का एक सेट जारी किया। लेकिन मई 2014 में, महिला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा कि उस पर निगरानी “व्यक्तिगत अनुरोध” पर की गयी थी, और वह अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गुजरात सरकार की शुक्रगुजार भी है । उस महिला ने अदालत से अनुरोध किया कि वह इस जांच को निरस्त करे, क्युकी ये उसकी निजता का उल्लंघन होगा।

इसके बाद अमित शाह को 2014 के लोकसभा चुनावो के लिए UP 80 सीटो के जित सुनिचित करने का दायित्व दिया गया और उन्होंने ये दायित्व 80 लोकसभा सीटो में से 73 सीट जीताकर परिपूर्ण भी किया | और बीजेपी ने 336 सीटो के साथ अपनी सरकार बनाई |

इसके बाद जुलाई 2014, में भाजपा के केंद्रीय संसदीय बोर्ड ने सर्वसम्मति से अमित शाह को पार्टी के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया।

2014-16 के दौरान उनके नेतृत्व में, भाजपा ने महाराष्ट्र, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, झारखंड और असम में विधान सभा चुनावों में सफलता हासिल की|

इसके बाद उन्हें 24 जनवरी 2016 को सर्वसम्मति से दुबारा भाजपा अध्यक्ष के रूप में चुना गया|

उन्हें 24 जनवरी 2016 को सर्वसम्मति से दुबारा भाजपा अध्यक्ष के रूप में चुना गया|

इसके बाद अमित शाह ने 2019 के लोक सभा चुनावो में दुबारा भाजपा को जीत दिलाई, और इस बार अकेली बीजेपी को 303 सीटो पर जित हासिल हुई| इस पूरी प्रक्रिया में अमित शाह अब तक के सबसे सफल भाजपा अध्यक्ष बने। चुनाव प्रचार के दौरान, उन्होंने 543 लोकसभा क्षेत्रों में से 312 का दौरा किया, जिसमें 18 रोड शो, 161 सार्वजनिक बैठकें, और 1,500 से अधिक सभाएँ आयोजित की गईं।

और अमित शाह जी ने 30 मई 2019 को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। और उन्होंने 1 जून 2019 को गृह मंत्री के रूप में पद ग्रहण किया|

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here