क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी | ऐसे करे गणेश जी की पूजा होगी सभी मनोकामना पूरी |

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    विनायक चतुर्थी हिन्दुओ का एक प्रसिद्ध त्यौहार है. यह त्यौहार भारत के विभिन्न भागो में मनाया जाता है. पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान् गणेश का जन्म हुआ था. गणेश चतुर्थी पर हिन्दु, भगवान गणेश k पूजा करते है. कई प्रमुख जगहों पर भगवान् गणेश कि बड़ी प्रतिमा स्थापित कि जाती है. इस प्रतिमा का दिन पूजन किया जाता है, और 9 दिन बाद गाजे बाजे के साथ किसी नदी या तालाब में विसर्जन किया जाता है.

    कैलेंडर में 2 चतुर्थी तिथि होती है. हिन्दू शास्त्रों के अनुसार चतुर्थी तिथि भगवान् गणेश से सम्बंधित होती है. शुकल पक्ष के दौरान अमावस्या के नए चाँद निअलने के बाद चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते है. और कृष्ण पक्ष के दौरान एक पूर्णिमा के बाद कि चतुर्थी को संकट तिथि कहते है.

    यद्यपि विनायक चतुर्थी तिथि हर महीने में आती है, लेकिन सबसे महतवपूर्ण विनायक तिथि भाद्रपद के महीने में होती है. भाद्रपद के समय में विनायक चतुर्थी, गणेश चतुर्थी के रूप में मनाई जाती है.

    गणेश चतुर्थी की कथा

    कथा के अनुसार कहा जाता है कि एक बार माता पार्वती स्नान करने से पहले, अपने मेल से एक बालक को बनती है और फिर अपनी शक्तियों से उसे जीवित कर देती है. और उसे अपना द्वारपाल बना कर स्नान करने चली जाती है. और साथ साथ ये कह कर जाती है कि किसीको अन्दर आने मत देना. कुछ समय पश्चात भगवान् शिव वह आते है. और भगवान् गणेश से अन्दर जाने का आग्रह करते है. किन्तु भगवान् शिव के बार बार आग्रह करने पर भी भगवान् गणेश उन्हें उंदर नहीं जाने देते. इस बात से क्रोधित होकर भगवान शिव गणेश जी का सर उनके धड से अलग कर देते है. माता पार्वती जब ये सब देखती है तो उन्हें बहुत क्रोध आता है, और वो भगवान् शिव से उन्हें पुनह जीवित करने को कहती है. तब भगवान् शिव गणेश जी के धड पर एक हाथी के बच्चे का सर लगा देते है. और तभी से ये तिथि गणेश चतुर्थी के रूप में मनाई जाने लगी है|

    गणेश चौर्थी कि एक और कथा

    कहा जाता है कि जब भगवान गणेश एक बार अपने चूहे के साथ खेल रहे थे. तो वो खेलते खेलते गिर जाते है और चंद्रमा उन्हें देख कर हसने लगते है| इस बात पर भगवान् गणेश को क्रुद्ध आ जाता है और वो चनरमा को श्राप देते हुए कहते है कि ” दुष्ट चंद्रमा तूने मेरा मजाक बनाया है. अबसे तेरा चेहरा काला हो जाएगा और जो भी कोई तुझे देखेगा वो कलंक रहित हो जाएगा. इसके बाद चंद्रमा को अपने किए पर बहुत पछतावा होता है और वो इस श्राप से मुक्त होने के लिए ये व्रत करते है. इसके बाद भगवान गणेश प्रसन्न हो जाते है और चनरमा को श्राप मुक्त कर देते है.

    गणेश चतुर्थी की पूजा विधि

    भार्द्पद की गणेश चतुर्थी को सबसे पहला पंचांग में मुहरत देख कर भगवान् श्री गणेश कि पूजा कि जाती है. इनकी पूजा करने के लिए किसी साफ़ सुथरी जगह पर रंगोली बनायीं जाती है . और उस पर चौकी को रख कर लाल कपडा बिछाया जाता है. और फिर गणेश जी कि स्थापना कि जाती है. इसके बाद एक पान का पत्ता और सवा रूपए रख कर पूजा कि सुपारी राखी जाती है. साथ ही साथ कलश भी रखा जाता है, और इस कलश में एक लौटा पानी दाल कर आम के पत्ते डाल कर एक नारियल रखा जाता है. इस कलश कि 9 दिन तक पूजा कि जाती है और 9 दिनबाद नारियल को तोड़ कर उसका प्रशाद खाया जाता है. भगवान् गणेश कि पूजा से पहले कलश कि पूजा कि जाती है.

    सुर इसके बाद जल, चावल, कुमकुम चढ़ा कर भगवान् गणेश को पुष्प अर्पित किए जाते है. भगवान् गणेश को मोदक बहुत पसंद है इसलिए गणेश जी को मोदक का भोग अवश्य लगाया जाता है. फिर गणेश वंदना और आरती कि जाती है. जो कोई भी मनुष्य गणेश जी कि पूजा करता है उसके जीवन के सभी दुःख दूर हो जाते है और कभी भी पैसो कि किल्लत नहीं होती.

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