क्या सोनिया गाँधी सच में है वेट्रेस? SONIA GANDHI BIOGRAPHY | काला सच

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सोनिया का जन्म इटली में विसेन्ज़ा से 20 कि०मी० दूर एक छोटे से गाँव लूसियाना में 9 दिसम्बर 1946 को हुआ था। शादी से पहले उनका असली नाम एंटोनियो माइनो था। उनके पिता का नाम स्टेफ़िनो मायनो था जिनका एक construction बिज़नस था और वे बैटीनो मुसोलिनी जो कि इटली का तानाशाह था उसकी सेना में काम करते थे वे एक फासीवादी सिपाही थे| जिन्हें रूस में 5 सालो के लिए जेल हुई थी। उनकी माता का नाम पाओलो मायनों था। उनकी दो बहनें है अनुष्का जिनका असली नाम है अलेजेंद्रिया और दूसरी बहन का नाम है नाडिया|

सोनिया गाँधी का बचपन टूरिन, इटली, से 8 कि०मी० दूर स्थित ओर्बसानो में व्यतीत हुआ। वहा वे रोमन काथोलिटिक परिवार में पली बड़ी| सनिया गाँधी ने अपनी शुरूआती शिक्षा एक कैथोलिक स्कूल, मारिया आसीलियेटि्रस स्कूल में अपने 13 वे वर्ष तक की । इसके बाद 1964 में वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में bell education trust के भाषा विद्यालय में अंग्रेज़ी भाषा का अध्ययन करने गयीं परन्तु सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया है की सोनिया गाँधी कभी कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय गयी ही नहीं | स्वामी जी एक बार कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में एक लेक्चर देने के लिए गए हुए थे तो उन्होंने वहां कॉलेज के अधिकारिओ से पूंछ कि सोनिया गांधी कॉलेज के दिनों में कैसी स्टूडेंट थी तो अधिकारिओ ने उन्हें बताया की सोनिया गांधी नाम की कोई लड़की यंहा नहीं पढ़ती थी तो स्वामी जी ने सोनिया का दूसरा नाम बताकर पूछा लेकिन इस नाम से भी कोई नहीं पढता था | और स्वामी जी इस चीज़ को यूनिवर्सिटी से लिखवाकर लाये थे की सोनिया गाँधी या अंतोनियो मैनो नाम कौई लड़की नहीं पढ़ती थी | बल्कि सोनिया गाँधी ने लेनोक्स स्कूल से इंग्लिश भासा का कोर्स किया था और ये स्कूल भी 1970 में बंद हो गया था | अंग्रेजी भाषा का कोर्स पूरा होने के बाद सोनिया गाँधी ने वेरासिटी रेस्टारेंट में एक वेट्रेस के रूप में काम करना शुरू कर दिया |

यंही सोनिया गाँधी की मुलाकात राजीव गांधी से हुई जो उस समय कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में पढ़ते थे। ऐसा नही है कि केवल राजीव गाँधी ही सोनिया से मिलने वाले उनके पुरुष मित्र थे। उनसे मिलने वाले अन्य पुरुष मित्रों में माधवराव सिंधिया तथा एक जर्मन पुरुष स्टीगलर प्रमुख थे जो कि सोनिया के घनिष्ठ मित्रों में थे। सोनिया गाँधी की माधवराव सिंधिया से मित्रता राजीव गांधी से विवाह के पश्चात भी लंबे समय तक जारी रही।

चलिए वापस आते है राजीव गाँधी पर , राजीव गाँधी 1962 से 1965 तक कैम्ब्रिज में Mechanical engineering में दाखिला लिया था! लेकिन वह परीक्षा पास नहीं कर सके इसीलिए ३ साल फ़ैल होने के बाद उन्होंने 1966 में लन्दन के इंपीरियल कॉलेज में दाखिल लिया , लेकिन यंहा भी डिग्री पूरी किये बिना ही कॉलेज छोड़ दिया | के.एन. राव ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि राजीव गांधी, सोनिया गाँधी से शादी करने के लिए एक कैथोलिक क्रिस्चियन बने और अपना नाम रोबर्तो रखा जिसके बाद उनके दो बच्चे हुए जिसमें से लडकी का नाम था “बियेन्का” और लडके का “रॉल”। और भारत कि जनता की आँखों में धुल झोकने के लिए राजीव-सोनिया का हिन्दू रीतिरिवाजों से पुनर्विवाह करवाया गया और बच्चों का नाम “बियेन्का” से बदलकर प्रियंका और “रॉल” से बदलकर राहुल कर दिया गया|

1968 में दोनों का विवाह होने बाद वे भारत में रहने लगीं।पहले सोनिया गाँधी हर पांच वर्ष बाद विदेशी कानून के तहत भारत में रहने का परमिट लिया करती थीं। यह परमिट उन लोगों को दिया जाता है जो कि अस्थार्इ तौर पर भारत रहने आते हैं। सोनिया ने सर्वप्रथम भारत में रहने का परमिट 1968 मे प्राप्त किया था जब वो पहली बार राजीव गाँधी के साथ भारत आई थी । 1973 मे पांच वर्ष की समाप्ति पर, अगर वे चाहतीं तो भारत की नागरिक बन सकतीं थीं लेकिन 1973 मे उन्होने पुन आवेदन करके अगले पांच वर्षों तक भारत में रहने का परमिट प्राप्त किया। इसके बाद 1978 में उन्होने दुबारा अगले पांच वर्षों के लिए भारत में रहने का परमिट लिया। और भारत का नागरिक बनने का आवेदन भी सोनिया गाँधी के नाम से नहीं बल्कि एन्टोनिया मैनो नाम से किया जाता था | सोनिया गाँधी ने भारत की नागरिकता विवाह के पंæह वर्ष के बाद यानी 30 अप्रैल 1983 को ली थी |

1982 मे आर्इ0आर्इ0टी0 गेट दिल्ली के पास रात २ बजे एक कार एक्सीडेंट हुआ जिसमे सिर्फ माधवराव सिंधिया सोनिया गांधी बैठी थी दोनो को काफी चोटें लगी थी। एक आर्इ0आर्इ0टी0 के छात्र ने उन दोनों को कार से बाहर निकाला| सोनिया गाँधी की इच्छा पर उन्हें प्रधानमंत्री निवास भेज दिया तथा माधवराव सिंधिया जिनका पैर टूट गया था उन्हें दिल्ली पुलिस ने आकर अस्पताल भेज दिया। माधवराव सिंधिया सोनिया गाँधी के धीरे-धीरे आलोचक होते जा रहे थे तथा उन्होने अपने निकटवर्ती मित्रों से सोनिया के सम्बन्ध मे संदेह जताया | और कुछ समय बाद ही 1 वायु दुर्घटना मे माधव राव सिंधिया की रहस्यपूर्ण परिसिथतियों में मौत हो गयी |

ऐसा कहा जाता है की इंदिरा गाँधी की बुलेटप्रूफ़ कारो का ठेका एक जर्मन कम्पनी को दिया गया जिसमे बिचोलिये का काम किया वाल्टर विंसी ने जोकि सोनिया गाँधी की बहन अनुष्का का पति था और इस डील में उसने हरी भरकम कमिसन खाया था इसके बाद

१९८६ 1986 में वाल्टर विंसी को भारत की एसपीजी को इटालियन सुरक्षा एजेंसियों द्वारा प्रशिक्षण दिये जाने का ठेका मिला, और इस सौदे के लिये उसने नगद भुगतान की मांग की और वो भुगतान सरकारी तौर पर किया भी गया ।इस नगद भुगतान के बारे में तत्कालीन कैबिनेट सचिव बी.जी.देशमुख ने अपनी किताब में उल्लेख किया है| और ये ट्रेनिंग भी असफ़ल रही और सारा पैसा लगभग व्यर्थ चला गया क्युकी इटली के जो सुरक्षा अधिकारी भारतीय एसपीजी कमांडो को प्रशिक्षण देने आये थे उनका रवैया जवानों के प्रति बेहद ख़राब था, एक जवान को तो उस दौरान थप्पड़ भी मारा गया । रॉ अधिकारियों ने यह बात राजीव गाँधी को बताई और कहा कि इस व्यवहार से सुरक्षा बलों के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और उनकी खुद की सुरक्षा व्यवस्था भी ऐसे में खतरे में पड़ सकती है, घबराये हुए राजीव ने तत्काल वह ट्रेनिंग रुकवा दी,लेकिन वह ट्रेनिंग का ठेका लेने वाले वाल्टर विंसी को तब तक भुगतान किया जा चुका था ।

ऐसा कहा जाता है की इंदिरा गाँधी को बेशक गोलिया मरी गयी थी लेकिन उनकी मृत्यु उनके दिल या दिमाग को गोलियां लगने से नहीं हुई, बल्कि बहुत ज्यादा खून बह जाने के कारण हुई थी! जब इंदिरा गाँधी को गोली लग चुकी थी तब सोनिया गाँधी ने अजीब व्यवहार करते हुए बजाय इंदिरा को एम्स ले जाने के (जहाँ इस तरह कि घटनाओ से निपटने के लिए प्रोटोकॉल था), बल्कि उसकी विपरीत दिशा में डॉक्टर राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में ले जाने पर जोर दिया! और बाद में अपना मन बदलते हुए फिर से फैसला बदला और इंदिरा को एम्स लाया गया! इस बीच करीब 24 मिनट बर्बाद हुए!

स्वीटजरलैंड की प्रसिद्ध प्रत्रिका स्केविटजर इलुस्ट्रेट के नवम्बर 1991 के अंक में छपी खबर के अनुसार राजीव गाँधी के पास स्वीस बैंक में लगभग 2 बिलियन डालर रुपये खाते में मौजूद थे । और यह खाता राजीव के मरने पर सोनिया को प्राप्त हो गया। मैगजीन में भी यह दर्शाया गया था कि KGB ने सोनिया गांधी जो कि भारतीय राजनेता से विवाहित है उसे इतनी मोटी रकम क्यों दी गई?

वही एक रिटायर इंडियन पुलिस सर्विस ऑफिसर मलय कृष्णा धर के द्वारा लिखित किताब ‘ओपन सीक्रेट’ में यह खुलासा किया है। बता दे कि मलय कृष्णा धर ने 29 वर्षों तक इंटेलिजेंस ब्यूरो में सेवा दी है।
उन्होंने कहा है कि, मेरी मेहनत भरी रिसर्च रंग लाई। उन चार मंत्रियों (इंदिरा सरकार के कैबिनेट मंत्री) और दो दर्जन सांसद KGB जोकि रूस की जासूसी एजेंसी है उसके लिए काम करते थे। KGB इन्हें इसके लिए मोटी रकम देता था।
इस किताब में उन्होंने सोनिया गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि सोनिया गांधी एक KGB द्वारा भेजी हुई जासूस है।

इसके साथ ही जब इंदिरा व राजीव प्रधानमंत्री थे उस समय ऐसा कोर्इ दिन नही जाता होगा जब बिना जाँच के डिब्बों में भर-भर कर सामान दिल्ली तथा चेन्नर्इ अंतर्राष्ट्रीय हवार्इ अडडे से रोम न जाता होगा। यह समान एयर इंडिया तथा एलिटेलिया जहाजों से जाता था। काँग्रेस के नेता अर्जन सिंह पहले मुख्यमंत्री के रुप में तथा बाद में केन्æीय मंत्री के रुप में सोनिया के कायोर्ं को अंजाम दिया करते थे। यहां से पुरातातिवक महत्व की बहूत सी वस्तुओं को पहले इटली की दो दुकानों जिनका संचालन सोनिया गाँधी की बहन अनुस्का उर्फ अलेजांड्रा किया करती थी में पहुचाया जाता था। इन दुकानों के नाम रिवोल्टा में एटनिका तथा ओरबासानो में गणपति नाम के थे। यहां से झूठा बिल बनाकर इन सामानों को सोथबीज तथा क्रिस्चीज को बेच दिया जाता था तथा इन्हे लंदन नीलामी द्वारा बिक्री हेतु भेज दिया जाता था। इसमें से कुछ धन राहुल गाँधी के नेशनल वेस्टमिनिस्टर बैंक तथा हांगकांग एन्ड संघार्इ बैंक के लंदन सिथत खाते में जमा हो जाता था। परंतु इसमे से ज्यादातर धन केमेन द्वीप सिथत बैंक आफ अमेरिका के गाँधी परिवार के खाते में चला जाता था।

इस मामले में सीबीआई ने तो साल 1993 में भारतीय एंटिक चुराने वालों का पता लगाने के लिए FIR तक दर्ज कर लिया था। लेकिन उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और मध्यप्रदेश में भी। सोनिया गांधी के विश्वस्त माने जाने वाले अर्जुन सिंह तब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।

अर्जुन सिंह की मदद से यूपीए सरकार पर दबाव डालकर उस FIR में सोनिया गांधी का नाम नहीं डाला गया। आरोप है कि इस संकट से बचने के लिए सोनिया गांधी ने सिर्फ अर्जुन सिंह का ही नहीं बल्कि कला विशेषज्ञ मारतंड सिंह, पाकिस्तानी दंपत्ति मुनीर और फरिदा अत्ताउल्लाह, लंदन में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के ISI एजेंट सलमान तासीर के अलावा लिट्टे की भी मदद ली थी!

पती की मृत्यु के बाद कांग्रेस के नेताओ ने सरकार संभालने के लिए सोनिया गांधी को बुलाया पर उन्होंने इंकार कर दिया और कहा की राजनीती से दूर रहने वाली है। लेकिन परिस्तिथियो को देखकर 1997 में राजनीती से जुड़ गयी। 1998 में सोनिया कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षा बनी इसके बाद

सोनिया गाँधी अक्तूबर 1999 में बेल्लारी कर्णाटक से और साथ ही अपने पति राजीव गाँधी के निर्वाचन क्षेत्र अमेठी से चुनाव लड़ा और करीब 3 लाख वोटो से दोनों जगह से जीत हासिल की और इसके बाद 1999 में 13वि लोक सभा में विपक्ष की नेता चुनी गयी | इसके बाद 2004 के लोकसभा के चुनावो में सोनिया गाँधी के नेत्रव ने कांग्रेस उनके सहयोगियों ने मिलकर 204 सीट जीती और सुबेर्मंयम स्वामी बताते है की 14 मई 2004 अखबारों में उन्होंने देखा कि सोनिया दावा कर रही थीं कि वही सरकार बनाएंगी।

उस समय वे मद्रास में थे, तब उन्होंने तत्कालीन रास्त्रपति कलाम को चिट्ठी लिखी और बताया कि हमारे देश के कानून के अनुसार वह पीएम नहीं बन सकती क्योंकि सोनिया की नागरिकता पर कई अंकुश लगे हुए हैं। उन्होंने अभी तक इतन्ली की नागरिकता नहीं छोड़ी है स्वामी जी ने संविधान के सेक्शन 5 के एक प्रावधान का जिक्र चिट्ठी में किया था।’
17, मई, 2004 की दोपहर को 12.30 को वे भी राष्ट्रपति से खुद मिले उनसे कहा कि सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री नियुक्त नहीं किया जा सकता | ये कानूनों के खिलाफ होगा

उसी दिन शाम पाँच बजे सोनिया गांधी को राष्ट्रपति से मिलना था जहाँ वे सरकार बनाने के लिए दावा पेश करने वालीं थीं| लेकिन दोपहर तीन बजे सोनिया गांधी के पास राष्ट्रपति भवन से एक चिट्ठी पहुँची, जिसमें लिखा था कि शाम पाँच बजे का अपॉइंटमेट रद्द किया जाता है और अगर वे चाहें को अगले दिन यानी 18 मई को मुलाक़ात हो सकती है|

और इसी के चलते सोनिया गाँधी ने मनमोहन सिंह को प्रधान मंत्री नियुक्त किया |

इसके बाद राष्ट्रीय सुझाव समिति का अध्यक्ष होने के कारण सोनिया गांधी पर लाभ के पद पर होने के साथ लोकसभा का सदस्य होने का आक्षेप लगा जिसके चलते 23 मार्च 2006 को उन्होंने राष्ट्रीय सुझाव समिति के अध्यक्ष के पद और लोकसभा का सदस्यता दोनों से त्यागपत्र दे दिया।

मई 2006 में वे रायबरेली, उत्तरप्रदेश से पुन: सांसद चुनी गईं और उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी को चार लाख से अधिक वोटों से हराया।
इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने फिर यूपीए के लिए देश की जनता से वोट मांगा। एक बार फिर यूपीए ने जीत हासिल की और सोनिया यूपीए की अध्यक्ष चुनी गईं।

2012 में बिजनेस इनसाइडर की आई रिपोर्ट के मुताबिक सोनिया गांधी के पास दो से 19 अरब डॉलर यानी करीब 99 अरब से लेकर 948 अरब रुपये की संपत्ति थी | जिससे वो दुनिया की चौथी सबसे अमीर राजनेता बन गयी थी

2013 में सोनिया गाँधी पहली महिला बनी जिन्होंने कांग्रेस के अध्यक्षा के रूप में अपने 15 साल पुरे किये |

इसके बाद 2014 के आम चुनावों में नरेन्द्र मोदी जी के नेटर्व में NDA ने ३३६ सीट जीतकर सरकार बनाई और कांग्रेस को इन चुनावों में सिर्फ 44 सीट मिली |

इसके बाद 1 नवंबर 2012 को, सुब्रमण्यम स्वामी ने दिल्ली की एक अदालत में एक निजी शिकायत दायर की की सोनिया गाँधी और उनके बेटे राहुल गाँधी ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की सार्वजनिक रूप से अपनी निजी कंपनी, यंग इंडियन के माध्यम से अधिग्रहण करके 16 अरब रुपयों की धोखाधड़ी की है | इसके बारे में विस्तार से जाननें के लिए यंहा इ बटन पे क्लिक करे |

केस की कई तारीख पड़ने के बाद 7 दिसम्बर को 2015 राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी को 9 तारीख को कोर्ट में पैस होने के लिए कहा गया लेकिन वे पेश नहीं हुए

और 19 दिसंबर 2015 को पटियाला हाउस अदालत ने सभी को जमानत दे दी, लेकिन उन्हें अगली सुनवाई की तारीख 20 फरवरी 2016 को अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया।

इसके बाद इनकम टैक्स विभाग ने नैशनल हेरल्ड के मामले में दोनों नेताओं पर तक़रीबन 100 करोड़ रुपये का दंड लगाया।

इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक़, 2011-12 में सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी ने तक़रीबन 155.41 करोड़ और 154.96 करोड़ रुपये अपनी आय में नहीं दिखाए हैं। जिसके एवज में दंड के तौर पर 100 करोड़ रुपये की देनदारी बनती है|

अभी सोनिया गाँधी इसी केस में जमानत पर जेल के बहार है | तो दोस्तों आपको क्या लगता है क्या सोनिया गांधी कभी भारत की बहु बन पाएगी या सिर्फ भारत को लूटना ही ऊनका मकसद है | हमे अपनी राय जरुर दे और हमारे Youtube चैनल kaam ki baat को सब्सक्राइब करना न भूले और यदि आपको हमारे विडियो पसंद आई तो हमे आप UPI पर सहायता राशि देकर हमे प्रोहोत्साहित करे तब तक लिए नमस्कार

विस्तार से जानने के लिए आप डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी की पुस्तक “Assassination Of Rajiv Gandhi — Unasked Questions and Unanswered Queries” (ISBN : 81-220-0591-8) पढ़ सकते हैं!. यह इस तरह के षड्यंत्र का संकेत करती है!

1) SONIA UNMASKED By S. Gurumurthy ((Published in TheNew Indian Express dt.17.04.04)

2) ‘ओपन सीक्रेट’ written by मलय कृष्णा धर (रिटायर इंडियन पुलिस सर्विस मलय कृष्णा धर ने 29 वर्षों तक इंटेलिजेंस ब्यूरो में सेवा दी है।)

3) बी.जी.देशमुख की किताब- A Cabinet Secretary Looks Back

4) who is soniya gandhi – नाम से छापा गया सुब्रमण्यम स्वामी जी द्वारा लिखित एक लेख।

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