ताज महल एक शिव मंदिर | Taj Mahal: A Temple Palace

0
253

ताज महल: शुरुआत होती है आगरा से,आगरा को प्राचीनकाल में अंगिरा कहते थे, क्योंकि यह ऋषि अंगिरा की तपोभूमि थी और ऋषि अंगिरा भगवान शिव के उपासक थे। प्राचीन काल से ही आगरा में 5 शिव मंदिर थे। लेकिन अब कुछ सदियों से बालकेश्वर, पृथ्वीनाथ, मनकामेश्वर और राजराजेश्वर नामक केवल 4 ही शिव मंदिर बचे हैं। 5वां शिव मंदिर नागनाथेश्वर था , जो कि तेजोमहालय मंदिर उर्फ ताजमहल था। तेजोमहालय को नागनाथेश्वर के नाम से जाना जाता था, क्योंकि उसके जलहरी को नाग के द्वारा लपेटा हुआ जैसा बनाया गया था। यह मंदिर विशालकाय महल क्षेत्र में था। अगर आप ताज महल देखने गए हो तो आपने ताज महल के सामने जमना के उस पार कुछ दीवारे खड़ी देखि होंगी| कहानी जो प्रचलित है वो ये है की शहजान्ह ने मुमताज के लिए संगमरमर के पत्थर जो सफेद होता है उस पत्थर का ताज महल बनवाया था इसी तरह शहजान्ह ने अपने लिए यानि अपनी कब्र के लिए संगमूसा का यानि काले पत्थर का ताज महल ठीक सफेद पत्थर के ताज महल के सामने जमना के उसपार बनवाना चाहता था| लेकिन कहते है की वो पूरा नहीं हो पाया|

आगरा का ताजमहल दिखाओ, आगरा का ताजमहल वीडियो, आगरा का लाल किला, उस्ताद अहमद लाहौरी, ताज महल आगरा, ताज महल इतिहास, ताज महल का रहस्य, ताज महल किसने बनवाया था, ताज महल के बारे मे जानकारी, ताज महल क्या है, ताज महल पर निबंध, ताज महल फोटो, ताजमहल एक शिव मंदिर, ताजमहल का इतिहास, ताजमहल का फोटो, ताजमहल का सच, ताजमहल किसने बनवाया, ताजमहल दफ़नाए गए, ताजमहल पर निबंध, तेजो महालय शिव मंदिर,
ताजमहल एक शिव मंदिर

लेकिन archeologist ने जो खोज की तो पता चला की उस तरफ जो दीवारे उठी खड़ी हुई है वो किसी बनने वाले महल की दीवारे नहीं है बल्कि एक बहोत बड़े महल की दीवारे है जो गिर चुका है, खंडर है| तो इसका मतलब ये है की वो दीवारे किसी नए बनने वाले महल की नहीं है बल्कि जो महल टूट गया है उसकी है| ताज महल के चारों तरफ सिपाहियों के खड़े होने के स्थान है,बंदूक और टॉप लगाने के स्थान है, जबकि कब्रों पर इनके लिए कोई जरूरत नहीं होती, वो महल है पुराना उसे सिर्फ कन्वर्ट किया गया है कब्र मे और दूसरी तरफ भी एक महल था वो गिर गया, जिसके खंडर रह गए है बस|

ताजमहल के हिन्दू निर्माण का साक्ष्य देने वाला काले पत्थर पर लिखा एक संस्कृत शिलालेख लखनऊ के वास्तु संग्रहालय में रखा हुआ है। यह सन् 1155 का है। उसमें राजा परमर्दिदेव के मंत्री सलक्षण द्वारा कहा गया है कि ‘स्फटिक जैसा शुभ्र इन्दुमौलीश्‍वर (शंकर) का मंदिर बनाया गया। (वह इतना सुंदर था कि) उसमें निवास करने पर शिवजी को कैलाश लौटने की इच्छा ही नहीं रही। वह मंदिर आश्‍विन शुक्ल पंचमी,यानि ( रविवार) को बनकर तैयार हुआ।

आगरा के ताजमहल का सच पूरी दुनिया के सामने लाने वाले श्री. पी.एन. ओक अपनी पुस्तक “Taj mahal is a Hindu Temple Palace” और “Taj Mahal: The True Story” में 100 से भी अधिक प्रमाण और तर्को का हवाला देकर बताते हैं कि ताजमहल वास्तव में शिव मंदिर है जिसका असली नाम तेजो महालय है,

सबसे पहले जान लेते है की P.N. OAK थे कौन थे, पन ओक शोदकर्ता और इतिहासकार थे जिनका जन्म 1917 मे इंदौर मे हुआ और MA LLB करने के बाद ब्रिटिश इंडिया मे gazetteer ऑफिसर रहे उसके बाद ये दूसरे विश्व युद्ध की लड़ाई सुभाष चंद जी के सनिध्य मे लड़े और फिर इन्होंने कितबे लिखनी शुरू की जिन्होंने दुनिया को हिल कर रख दिया| जैसे

क्रिश्चियनिटी इज़ कृष्ण-नीति

द ताजमहल इज़ अ टेंपल प्लेस

हू सेज़ अकबर वाॅज़ ग्रेट

आगरा रेड फोर्ट इज़ अ हिंदू बिल्डिंग

सम ब्लंडर्स ऑफ़ इंडियन हिस्टोरिकल रिसर्च

वर्ल्ड वैदिक हेरिटेज: अ हिस्ट्री ऑफ़ हिस्ट्रीज़

ताजमहल: द ट्रू स्टोरी

वॉज़ काबा अ हिदू टेंपल?

लर्निंग वैदिक एस्ट्रोलॉजी आदि

तो उन्होंने भारत देश के इतिहास को पुर्नोत्थान और सही दिशा में ले जाने का काम किया है। मुगलो और अग्रेजो के समय मे भारत के इतिहास के साथ जिस प्रकार छेड़छाड़ की गई और आज वर्तमान तक मे की जा रही है, उसका विरोध और सही प्रस्तुतिकरण करने वाले प्रमुख इतिहासकारो में पुरूषोत्तम ओक का नाम लिया जाता है। पुरूषोत्तम जी ने ताजमहल की भूमिका, इतिहास और पृष्ठभूमि सभी का अध्ययन किया और तस्वीरों, चित्रों के द्वारा उसे प्रमाणित करने का प्रयास किया की ताजमहल असल मे हिन्दू शिवमंदिर था|

यह आर्टिकल प्रोफ़ेसर पुरुषोत्तम नाथ ओक के तर्कों पर आधारित है जिसमे ताजमहल को मकबरा न बताकर हिंदू शिव मन्दिर बताया गया है और आज भी ताजमहल के 22 कमरे शाहजहाँ के काल से बंद पड़े हैं| ताज महल के सम्बन्ध में एक कहानी प्रचलित है कि ताजमहल के अन्दर मुमताज की कब्र पर सदैव बूँद-बूँद कर पानी टपकता रहता है, यदि यह सत्य है तो पूरे विश्व मे किसी भी कब्र पर बूँद बूँद कर पानी नही टपकाया जाता, जबकि प्रत्येक हिंदू शिव मन्दिर में ही शिवलिंग पर बूँद-बूँद कर पानी टपकाने की व्यवस्था की जाती है, फ़िर ताजमहल जिसे मक़ब्रा बताया जाता है, उसमें बूँद बूँद कर पानी टपकाने का क्या मतलब? इस बात का तोड़ आज तक नहीं खोजा जा सका है।

आगरा का ताजमहल दिखाओ, आगरा का ताजमहल वीडियो, आगरा का लाल किला, उस्ताद अहमद लाहौरी, ताज महल आगरा, ताज महल इतिहास, ताज महल का रहस्य, ताज महल किसने बनवाया था, ताज महल के बारे मे जानकारी, ताज महल क्या है, ताज महल पर निबंध, ताज महल फोटो, ताजमहल एक शिव मंदिर, ताजमहल का इतिहास, ताजमहल का फोटो, ताजमहल का सच, ताजमहल किसने बनवाया, ताजमहल दफ़नाए गए, ताजमहल पर निबंध, तेजो महालय शिव मंदिर,
ताज महल विश्व युद्ध २ के समय

राजनीतिक भर्त्सना के डर से तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने ओक की सभी पुस्तकों पर रोक लगा दी थी और संपादकों को भयंकर परिणाम भुगत लेने की धमकियां दी गईं थीं।
प्रो. ओक के अपने अनुसंधान के दौरान ये खोजा कि इस शिव मन्दिर को शाहजहाँ ने जयपुर के महाराज जयसिंह से अवैध तरीके से छीन लिया था और इस पर अपना कब्ज़ा कर लिया।

शाहजहाँ के दरबारी लेखक “मुल्ला अब्दुल हमीद लाहौरी” ने अपने “बादशाहनामा” में मुग़ल शासक बादशाह का संपूर्ण वृतांत लिखा है, जिसके खंड एक के पृष्ठ 402 और 403 पर इस बात का उल्लेख है कि, शाहजहाँ की बेगम मुमताज-उल-ज़मानी जिसे मृत्यु के बाद, बुरहानपुर मध्य प्रदेश में अस्थाई तौर पर दफना दिया गया था और इसके 6 महीने बाद तारीख़ 15 ज़मदी-उल- अउवल दिन शुक्रवार,को अकबराबाद आगरा लाया गया फ़िर उसे महाराजा जय सिंह से लिए गए, आगरा में स्थित एक असाधारण रूप से सुंदर और शानदार भवन (इमारतें आलीशान) मे पुनः दफनाया गया,लाहौरी के अनुसार राजा जय सिंह अपने पुरखों कि इस आली मंजिल से बेहद प्यार करते थे ,पर बादशाह के दबाव मे वह इसे देने के लिए तैयार हो गए थे।

इस बात कि पुष्टि के लिए यहाँ ये बताना जरूरी है कि जयपुर के पूर्व महाराज के गुप्त संग्रह में वे दोनो आदेश अभी तक रखे हुए हैं जो शाहजहाँ द्वारा ताज भवन को समर्पित करने के लिए राजा जय सिंह को दिए गए थे। अब जब शाहजहाँ की बेगम अर्जुमंद बानो यानि (मुमताज) को बुरहानपुर (म0प्र0) में ही दफना दिया गया था, जो अपने 14वें बच्चे के जन्म के समय मरी थी, तो फिर आगरा में उसकी कब्र कहां से आ गयी? और एक नहीं, दो कब्रें। एक ऊपर है एक नीचे। एक को असली और दूसरी को नकली कहते हैं, जबकि वे दोनों ही नकली हैं। और मुस्लिम समाज में कब्र खोदना कुफ्र बताया गया है,

शाहजहाँ असल मे मुग़लों के चाकर राजा जय सिंह के वीर पूर्वजों ने बनवाया था, पर शाहजहाँ ने दबाव डालकर जय सिंह से इसे ले लिया। फिर कुरान की आयतें, नकली कब्रें बनाकर उसे प्रेम का प्रतीक घोषित कर दिया। और नकली कब्रें जानबूझ कर वहीं बनाई गयीं, जहां शिवलिंग स्थापित था। ताजमहल में नीचे की ओर 22 कमरे हैं, जिन्हें खोला नहीं जाता। कहते हैं कि वहां वे सब देव प्रतिमाएं रखी हैं, जिन्हें मंदिर से हटा दिया गया था। कार्बन डेटिंग के आधार पर इसे 1,400 साल पुराना बताया गया है|

आगरा का ताजमहल दिखाओ, आगरा का ताजमहल वीडियो, आगरा का लाल किला, उस्ताद अहमद लाहौरी, ताज महल आगरा, ताज महल इतिहास, ताज महल का रहस्य, ताज महल किसने बनवाया था, ताज महल के बारे मे जानकारी, ताज महल क्या है, ताज महल पर निबंध, ताज महल फोटो, ताजमहल एक शिव मंदिर, ताजमहल का इतिहास, ताजमहल का फोटो, ताजमहल का सच, ताजमहल किसने बनवाया, ताजमहल दफ़नाए गए, ताजमहल पर निबंध, तेजो महालय शिव मंदिर,
ताज महल फैक्ट्स

P.N. OAK JI ने तेजोमहालय मंदिर कहे जाने के लेकर की एविडन्स दिए जैसे की

  • हिन्दू मंदिर प्रायः नदी या समुद्र तट पर बनाए जाते हैं। ताज भी यमुना नदी के तट पर बना है, जो कि शिव मंदिर के लिए एक उपयुक्त स्थान है।
  • शिव मंदिर में एक मंज़िल के ऊपर एक और मंज़िल में दो शिवलिंग स्थापित करने का हिंदुओं में रिवाज था, जैसा कि उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर और सोमनाथ मंदिर में देखा जा सकता है।
  • ताजमहल में एक कब्र तहखाने में और एक कब्र उसके ऊपर की मंजिल के कक्ष में है तथा दोनों ही कब्रों को मुमताज का बताया जाता है।
  • जिन संगमरमर के पत्थरों पर कुरान की आयतें लिखी हुई हैं उनके रंग में पीलापन है जबकि शेष पत्थर ऊंची गुणवत्ता वाले सफेद रंग के हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि कुरान की आयतों वाले पत्थर बाद में लगाए गए हैं। उन अक्षरों को खोदने वाले अमानत ख़ान शिराज़ी ने खुद ही उसी इमारत के एक शिलालेख में लिखा है। कुरान के उन आयतों के अक्षरों को ध्यान से देखने से पता चलता है कि उन्हें एक प्राचीन शिव मंदिर के पत्थरों के टुकड़ों से बनाया गया है।
  • ताज के दक्षिण में एक प्राचीन पशुशाला है। जहा पर तेजोमहालय की पालतू गायों को बांधा जाता था। मुस्लिम कब्र में गोशाला होना एक असंगत बात है।
  • ताजमहल में चारों ओर चार एक समान प्रवेश द्वार हैं, जो कि हिन्दू भवन निर्माण का एक विलक्षण तरीका है जिसे कि चतुर्मुखी भवन कहा जाता है। ताजमहल में ध्वनि को गुंजाने वाला गुम्बद है। हिन्दू मंदिरों के लिए गूँज उत्पन्न करने वाले गुम्बजों का होना अनिवार्य है। बौद्ध काल में इसी तरह के शिव मंदिरों का अधिक निर्माण हुआ था। ताजमहल का गुम्बज कमल की आकृति से अलंकृत है।
  • ताजमहल के गुम्बज में सैकड़ों लोहे के छल्ले लगे हुए हैं जिस पर बहुत ही कम लोगों का ध्यान जा पाता है। इन छल्लों पर मिट्टी के आलोकित दीये रखे जाते थे जिससे कि सारा मंदिर जगमग हो जाता था। ताजमहल की चारों मीनारें बाद में बनाई गईं।

इतिहासकार ओक के अनुसार ताज एक सात मंजिला भवन है। शहज़ादे औरंगज़ेब के शाहजहाँ को लिखे पत्र में भी इस बात का विवरण है। भवन की चार मंज़िलें संगमरमर पत्थरों से बनी हैं जिनमें चबूतरा, चबूतरे के ऊपर विशाल वृत्तीय मुख्य कक्ष और तहखाने का कक्ष शामिल है। मध्य में दो मंज़िलें और हैं जिनमें 12 से 15 विशाल कक्ष हैं।

संगमरमर की इन चार मंजिलों के नीचे लाल पत्थरों से बनी दो और मंज़िलें हैं, जो कि पिछवाड़े में नदी तट तक चली जाती हैं। सातवीं मंज़िल अवश्य ही नदी तट से लगी भूमि के नीचे होनी चाहिए, क्योंकि सभी प्राचीन हिन्दू भवनों में भूमिगत मंज़िल हुआ करती है। नदी तट के भाग में संगमरमर की नींव के ठीक नीचे लाल पत्थरों वाले 22 कमरे हैं जिनके झरोखों को शाहजहाँ ने चुनवा दिया था ।

इन 22 कमरों की दीवारों तथा भीतरी छतों पर अभी भी प्राचीन हिन्दू चित्रकारी अंकित हैं। इन कमरों से लगा हुआ लगभग 33 फुट लंबा गलियारा है। गलियारे के दोनों सिरों में एक-एक दरवाज़े बने हुए हैं। इन दोनों दरवाजों को इस प्रकार से आकर्षक रूप से ईंटों और गारे से चुनवा दिया गया है कि वे दीवार जैसे प्रतीत हों।

आगरा का ताजमहल दिखाओ, आगरा का ताजमहल वीडियो, आगरा का लाल किला, उस्ताद अहमद लाहौरी, ताज महल आगरा, ताज महल इतिहास, ताज महल का रहस्य, ताज महल किसने बनवाया था, ताज महल के बारे मे जानकारी, ताज महल क्या है, ताज महल पर निबंध, ताज महल फोटो, ताजमहल एक शिव मंदिर, ताजमहल का इतिहास, ताजमहल का फोटो, ताजमहल का सच, ताजमहल किसने बनवाया, ताजमहल दफ़नाए गए, ताजमहल पर निबंध, तेजो महालय शिव मंदिर,
ताज महल का कंगुरा

शाहजहाँ द्वारा चुनवाए गए इन दरवाज़ों को कई बार खुलवाया और फिर से चुनवाया गया है। सन् 1934 में दिल्ली के एक निवासी ने चुनवाए हुए दरवाज़े के ऊपर पड़ी एक दरार से झांककर देखा था। उसके भीतर एक बहोत बड़ा कमरा है और वहां के दृश्य को देखकर वह हक्का-बक्का रह गया था| उसने वहां बीचोंबीच भगवान शिव का चित्र देखा जिसका सिर कटा हुआ था और उसके चारों ओर बहुत सारी मूर्तियों का जमावड़ा था। ऐसा भी हो सकता है कि वहां पर संस्कृत के शिलालेख भी हों। ताजमहल के उन कमरों मे हिन्दू चित्र, संस्कृत शिलालेख, धार्मिक लेख, सिक्के तथा अन्य उपयोगी वस्तुए भारी पड़ी है|

फ्रांसीसी यात्री बेर्नियर ने लिखा है कि ताज के निचले रहस्यमय कक्षों में गैर मुस्लिमों को जाने की इजाज़त नहीं थी, क्योंकि वहां चौंधिया देने वाली वस्तुएँ थीं। वे तो लूटी हुई वस्तुएँ थीं और शाहजहाँ उन्हें अपने खजाने में ले जाना चाहता था इसीलिए वह नहीं चाहता था कि कोई उन्हें देखे। नदी के पिछवाड़े में हिन्दू बस्तियां, बहुत से हिन्दू प्राचीन घाट और प्राचीन हिन्दू शव दाह गृह हैं। यदि शाहजहाँ ने ताज को बनवाया होता तो इन सबको नष्ट कर दिया गया होता।

जयपुर के पूर्व महाराजा ने अपनी दैनंदिनी में 18 दिसंबर, 1633 को जारी किए गए शाहजहाँ के ताज भवन समूह को मांगने के बाबत दो फरमानों (नए क्रमांक आर. 176 और 177) के विषय में लिख रखा है। ताजमहल के बाहर पुरातत्व विभाग में रखे हुए शिलालेख में ये लिखा है की शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज महल को दफ़नाने के लिए एक विशाल इमारत बनवाई जिसे बनाने में सन् 1631 से लेकर 1653 तक 22 वर्ष लगे।

यह शिलालेख ऐतिहासिक घपले का नमूना है। प्रोफ़ेसर ओक लिखते हैं कि औरंगज़ेब द्वारा अपने पिता को लिखी गई चिट्ठी को कम से कम तीन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक वृत्तांतों में दर्ज किया गया है जिनके नाम ‘आदाब-ए-आलमगिरी’, ‘यादगारनामा’ और ‘मुरुक्का-ए-अकबराबादी’ (1931 में सैद अहमद, आगरा द्वारा संपादित, पृष्ठ 43, टीका 2) हैं। उस चिट्ठी में सन् 1662 में औरंगज़ेब ने खुद लिखा है कि मुमताज के सात मंजिला लोकप्रिय दफन स्थान के प्रांगण में स्थित कई इमारतें इतनी पुरानी हो चुकी हैं कि उनमें पानी चू रहा है और गुम्बद के उत्तरी सिरे में दरार पैदा हो गई है। इसी कारण से औरंगज़ेब ने खुद के खर्च से इमारतों की तुरंत मरम्मत के लिए फरमान जारी किया और बादशाह से सिफारिश की कि बाद में और भी विस्तार पूर्वक मरम्मत कार्य करवाया जाए। यह इस बात का साक्ष्य है कि शाहजहाँ के समय में ही ताज प्रांगण इतना पुराना हो चुका था कि तुरंत मरम्मत करवाने की जरूरत थी।

ताजमहल शब्द के अंत में आये ‘महल’ मुस्लिम शब्द है ही नहीं, अफग़ानिस्तान से लेकर अल्जीरिया तक किसी भी मुस्लिम देश में एक भी ऐसी इमारत नहीं है जिसे कि महल के नाम से पुकारा जाता हो। साधारणतः समझा जाता है कि ताजमहल नाम मुमताज महल, जो कि वहां पर दफनाई गई थी, के कारण पड़ा है। यह बात कम से कम दो कारणों से तर्कसम्मत नहीं है – पहला यह कि शाहजहाँ के बेगम का नाम मुमताज महल था ही नहीं, उसका नाम मुमताज़-उल-ज़मानी था और दूसरा यह कि किसी इमारत का नाम रखने के लिय मुमताज़ नामक औरत के नाम से “मुम” को हटा देने का कुछ मतलब नहीं निकलता।

चूँकि महिला का नाम मुमताज़ था जो कि ज़ अक्षर मे समाप्त होता है न कि ज में (अंग्रेजी का Z न कि J), भवन का नाम में भी ताज के स्थान पर ताज़ होना चाहिये था (अर्थात् यदि अंग्रेजी में लिखें तो Taj के स्थान पर Taz होना था जैसा कि उर्दू में ज के लिए J नही Z का उपयोग किया जाता है)।

शाहजहाँ के समय यूरोपीय देशों से आने वाले कई लोगों ने भवन का उल्लेख ‘ताज-ए-महल’ के नाम से किया है जो कि उसके शिव मंदिर वाले परंपरागत संस्कृत नाम तेजोमहालय से मेल खाता है। इसके विरुद्ध शाहजहाँ और औरंगज़ेब ने बड़ी सावधानी के साथ संस्कृत से मेल खाते इस शब्द का कहीं पर भी प्रयोग न करते हुये उसके स्थान पर पवित्र मकब़रा शब्द का ही प्रयोग किया है।

मक़बरे को कब्रगाह ही समझना चाहिये, न कि महल, इस प्रकार से समझने से यह सत्य अपने आप समझ में आ जायेगा कि हुमायुँ, अकबर, मुमताज़, एतमातुद्दौला और सफ़दरजंग जैसे सारे शाही और दरबारी लोगों को हिंदू महलों या मंदिरों में दफ़नाया गया है।

यदि ताज का अर्थ कब्रिस्तान है तो उसके साथ महल शब्द जोड़ने का कोई तुक ही नहीं है। ताजमहल शब्द का प्रयोग मुग़ल दरबारों में कभी किया ही नहीं जाता था, ताजमहल के विषय में किसी प्रकार की मुग़ल व्याख्या ढूंढना ही असंगत है। ‘ताज’ और ‘महल’ दोनों ही संस्कृत मूल के शब्द हैं।

ताजमहल शिव मंदिर को इंगित करने वाले शब्द तेजोमहालय शब्द का अपभ्रंश है। तेजोमहालय मंदिर में अग्रेश्वर महादेव प्रतिष्ठित थे। संगमरमर की सीढ़ियाँ चढ़ने के पहले जूते उतारने की परंपरा शाहजहाँ के समय से भी पहले की थी| यदि ताज का निर्माण मक़बरे के रूप में हुआ होता तो जूते उतारने की आवश्यकता ही नहीं होती क्योंकि किसी मक़बरे में जाने के लिये जूता उतारना अनिवार्य नहीं होता।

देखने वालों ने अवलोकन किया होगा कि तहखाने के अंदर कब्र वाले कमरे में केवल सफेद संगमरमर के पत्थर लगे हैं जबकि अटारी व कब्रों वाले कमरे में पुष्प लता आदि से चित्रित पच्चीकारी की गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि मुमताज़ के मक़बरे वाला कमरा ही शिव मंदिर का गर्भ गृह है।

संगमरमर की जाली में 108 कलश चित्रित उसके ऊपर 108 कलश आरूढ़ हैं, हिंदू मंदिर परंपरा में 108 की संख्या को पवित्र माना जाता है।

वास्तुकला की विश्वकर्मा वास्तुशास्त्र नामक प्रसिद्ध ग्रंथ में शिवलिंगों में ‘तेज-लिंग’ का वर्णन आता है। ताजमहल में ‘तेज-लिंग’ प्रतिष्ठित था इसलिये उसका नाम तेजोमहालय पड़ा था।

किसी भी ऐतिहासिक वृतान्त में ताजमहल, मुमताज़ तथा दफ़न का कहीं भी जिक्र नहीं है। न ही पत्थरों के परिमाण और दाम का कहीं जिक्र है।

विदेशी और यूरोपीय आगंतुकों के अभिलेख

विदेशी आगंतुक जैसे टॉवेर्नियर, पीटर मुंडी, डी लॉएट, इन सभी ने समय समय आगरा मे एक सफेद रंग के शिव मंदिर के बारे मे लिखा है, जैसे जॉन अल्बर्ट मान्डेल्सो ने (अपनी पुस्तक `Voyages and Travels to West-Indies में सन् 1638 में (मुमताज़ के मौत के केवल 7 साल बाद) आगरा के जन-जीवन का विस्तृत वर्णन किया है परंतु उसमें ताजमहल के निर्माण के बारे में कुछ भी नहीं लिखा है जबकि कहा ये जाता है कि सन् 1631 से 1653 तक ताज महल का निर्माण होता रहा था।

शाहजहाँ कितना झुट है उसका आइक प्रमाण Archaeological Survey of India Reports (1874 में प्रकाशित) के पृष्ठ 216-217, खंड 4 में मिलता है जिसमें लिखा है, “Great square black ballistic pillar which, with the base and capital of another pillar….now in the grounds of Agra,…it is well known, once stood in the garden of Taj mahal”.

थॉमस ट्विनिंग नामक एक अंग्रेज ने भी अपनी पुस्तक “Travels in India A Hundred Years ago” के पृष्ठ 191 में लिखा है,की “सन् 1794 के नवम्बर माह में मैं ताज-ए-महल और उससे लगे हुये अन्य भवनों को घेरने वाली ऊँची दीवार के पास पहुँचा। वहाँ से मैंने पालकी ली और….. बीचोबीच बनी हुई एक सुंदर दरवाजे जिसे कि गजद्वार (‘COURT OF ELEPHANTS’) कहा जाता था की ओर जाने वाली छोटे कदमों वाली सीढ़ियों पर चढ़ा।”

दरअसल शाहजहाँ ने तेजोमहालय के संस्कृत शिलालेखों व देवी-देवताओं की प्रतिमाओं और दो हाथियों की विशाल प्रतिमाओं के साथ बुरी तरह तोड़ फोड़ करके वहाँ कुरान की आयतों को लिखवा कर ताज को विकृत कर दिया, हाथियों की इन दो प्रतिमाओं के सूंड आपस में स्वागत द्वार के रूप में जुड़े हुये थे, (जहाँ पर दर्शक आजकल प्रवेश की टिकट प्राप्त करते हैं) वहीं ये प्रतिमाएँ स्थित थीं।

वैज्ञानिक पद्धति कार्बन 14 द्वारा जाँच

ताज के नदी के तरफ के दरवाजे लकड़ी के एक टुकड़े को एक अमेरिकन प्रयोगशाला में कि गई जाँच से पता चला है कि लकड़ी का वो टुकड़ा शाहजहाँ के काल से 300 वर्ष पहले का है, क्योंकि ताज के दरवाजों को 11वी सदी से ही मुस्लिम आक्रामकों के द्वारा कई बार तोड़कर खोला गया है और फिर से बंद करने के लिये दूसरे दरवाजे भी लगाये गये हैं, ताज और भी पुराना हो सकता है। असल में ताज को सन् 1115 में अर्थात् शाहजहाँ के समय से लगभग 500 वर्ष पूर्व बनवाया गया था।

बनावट तथा वास्तुशास्त्रीय तथ्य द्वारा जॉच

ई.बी. हॉवेल, श्रीमती केनोयर और सर डब्लू.डब्लू. हंटर जैसे पश्चिम के जाने माने वास्तुशास्त्री, ने ताजमहल के अभिलेखों का अध्ययन करके यह राय दी है कि ताजमहल हिंदू मंदिरों जैसा भवन है। हॉवेल ने तर्क दिया है कि जावा देश के चांदी सेवा मंदिर का ground plan ताज महल के समान है।

चार छोटे छोटे सजावटी गुम्बदों के मध्य एक बड़ा मुख्य गुम्बद होना हिंदू मंदिरों की सार्वभौमिक विशेषता है। चार कोणों में चार स्तम्भ बनाना हिंदू विशेषता रही है। इन चार स्तम्भों से दिन में चौकसी का कार्य होता था और रात्रि में प्रकाश स्तम्भ का कार्य लिया जाता था। ये स्तम्भ भवन के पवित्र अधिसीमाओं का निर्धारण का भी करती थीं। हिंदू विवाह वेदी और भगवान सत्य नारायण के पूजा वेदी में भी चारों कोणों में इसी प्रकार के चार खम्भे बनाये जाते हैं।

ताजमहल की अष्टकोणीय संरचना विशेष हिंदू अभिप्राय की अभिव्यक्ति है क्योंकि केवल हिंदुओं में ही आठ दिशाओं के विशेष नाम होते हैं और उनके लिये खगोलीय रक्षकों का निर्धारण किया जाता है। स्तम्भों के नींव तथा बुर्ज क्रमशः धरती और आकाश के प्रतीक होते हैं। हिंदू दुर्ग, नगर, भवन या तो अष्टकोणीय बनाये जाते हैं या फिर उनमें किसी न किसी प्रकार के अष्टकोणीय लक्षण बनाये जाते हैं तथा उनमें धरती और आकाश के प्रतीक स्तम्भ बनाये जाते है|

आगरा का ताजमहल दिखाओ, आगरा का ताजमहल वीडियो, आगरा का लाल किला, उस्ताद अहमद लाहौरी, ताज महल आगरा, ताज महल इतिहास, ताज महल का रहस्य, ताज महल किसने बनवाया था, ताज महल के बारे मे जानकारी, ताज महल क्या है, ताज महल पर निबंध, ताज महल फोटो, ताजमहल एक शिव मंदिर, ताजमहल का इतिहास, ताजमहल का फोटो, ताजमहल का सच, ताजमहल किसने बनवाया, ताजमहल दफ़नाए गए, ताजमहल पर निबंध, तेजो महालय शिव मंदिर,
ताज महल की पुराणी तस्वीर

ताजमहल के गुम्बद के बुर्ज पर एक त्रिशूल लगा हुआ है। इस त्रिशूल का प्रतिरूप ताजमहल के पूर्व दिशा में लाल पत्थरों से बने प्रांगण में नक्काशा गया है। त्रिशूल के मध्य वाली डंडी एक कलश को प्रदर्शित करता है जिस पर आम की दो पत्तियाँ और एक नारियल रखा हुआ है। इसी प्रकार के बुर्ज हिमालय में स्थित हिंदू तथा बौद्ध मंदिरों में भी देखे गये हैं। ताजमहल के चारों दशाओं में बहुमूल्य व उत्कृष्ट संगमरमर से बने दरवाज़ों के शीर्ष पर भी लाल कमल की पृष्ठभूमि वाले त्रिशूल बने हुये हैं।

सदियों से लोग बड़े प्यार के साथ परंतु गलती से इन त्रिशूलों को इस्लाम का प्रतीक चांद-तारा मानते आ रहे हैं और यह भी समझा जाता है कि अंग्रेज शासकों ने इसे विद्युत चालित करके इसमें चमक पैदा कर दिया था। जबकि इस लोकप्रिय मानना के विरुद्ध यह हिंदू धातुविद्या का चमत्कार है क्योंकि यह जंगरहित मिश्रधातु का बना है और प्रकाश विक्षेपक भी है। त्रिशूल के प्रतिरूप का पूर्व दिशा में होना भी अर्थसूचक है क्योंकि हिंदुओं में पूर्व दिशा को, उसी दिशा से सूर्योदय होने के कारण, विशेष महत्व दिया गया है. गुम्बद के बुर्ज अर्थात् (त्रिशूल) पर ताजमहल के अधिग्रहण के बाद ‘अल्लाह’ शब्द लिख दिया गया है जबकि लाल पत्थर वाले पूर्वी प्रांगण में बने प्रतिरूप में ‘अल्लाह’ शब्द कहीं भी नहीं है।

अन्‍य असंगतियाँ

शुभ्र ताज के पूर्व तथा पश्चिम में बने दोनों भवनों के ढांचे, माप और आकृति में एक समान हैं और आज तक इस्लाम की परंपरानुसार पूर्वी भवन को सामुदायिक कक्ष (community hall) बताया जाता है जबकि पश्चिमी भवन पर मस्जिद होने का दावा किया जाता है। दो अलग-अलग उद्देश्य वाले भवन एक समान कैसे हो सकते हैं? इससे सिद्ध होता है कि ताज पर शाहजहाँ के अधिपत्य हो जाने के बाद पश्चिमी भवन को मस्ज़िद के रूप में प्रयोग किया जाने लगा। आश्चर्य की बात है कि बिना मीनार के भवन को मस्ज़िद बताया जाने लगा। वास्तव में ये दोनों भवन तेजोमहालय के स्वागत भवन थे।

उसी किनारे में कुछ गज की दूरी पर संगीत कक्ष है जो कि इस्लाम के लिये एक बहुत बड़ी असंगति है (क्योंकि शोरगुल वाला स्थान होने के कारण नक्कारख़ाने के पास मस्ज़िद नहीं बनाया जाता)। इससे इंगित होता है कि पश्चिमी भवन मूलतः मस्जिद नहीं था। इसके विरुद्ध हिंदू मंदिरों में सुबह शाम आरती में विजयघंट, घंटियों, नगाड़ों आदि का मधुर नाद अनिवार्य होने के कारण इन वस्तुओं के रखने का स्थान होना आवश्यक है।

ताजमहल में मुमताज़ महल के नकली कब्र वाले कमरे की दीवारों पर बनी फूल-पत्ती, शंख, घोंघा तथा हिंदू अक्षर ॐ चित्रित है। कमरे में बनी संगमरमर की अष्टकोणीय जाली के ऊपरी कठघरे में गुलाबी रंग के कमल फूलों की खुदाई की गई है। कमल, शंख और ॐ के हिंदू देवी-देवताओं के साथ संयुक्त होने के कारण उनको हिंदू मंदिरों में मूलभाव के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।

जहाँ पर आज मुमताज़ का कब्र बनी हुई है वहाँ पहले तेज लिंग हुआ करता था जो कि भगवान शिव का पवित्र प्रतीक है। इसके चारों ओर परिक्रमा करने के लिये पाँच गलियारे हैं। संगमरमर के अष्टकोणीय जाली के चारों ओर घूम कर या कमरे से लगे विभिन्न विशाल कक्षों में घूम कर और बाहरी चबूतरे में भी घूम कर परिक्रमा कि जा सकति थी। हिंदू रिवाजों के अनुसार परिक्रमा गलियारों में देवता के दर्शन हेतु झरोखे बनाये जाते हैं।

ताज के इस पवित्र स्थान में चांदी के दरवाजे और सोने के कठघरे थे जैसा कि हिंदू मंदिरों में होता है। संगमरमर के अष्टकोणीय जाली में मोती और रत्नों की लड़ियाँ भी लटकती थीं।

ताज भवन में ऐसी व्यवस्था की गई थी कि हिंदू परंपरा के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात्रि में अपने आप शिव लिंग पर जल की बूंद टपके। इस पानी के टपकने को इस्लाम धारणा का रूप दे कर शाहजहाँ के प्रेमाश्रु बताया जाने लगा।

ताजमहल में खजाने वाला कुआँ

तथाकथित मस्जिद और नक्कारखाने के बीच एक अष्टकोणीय कुआँ है जिसमें पानी के तल तक सीढ़ियाँ बनी हुई हैं। यह हिंदू मंदिरों का परंपरागत खजाने वाला कुआँ है। खजाने के संदूक नीचे की मंजिलों में रखे जाते थे| एक मक़बरे में इतना परिश्रम करके बहुमंजिला कुएँ बनाना बेमानी है। इतना विशाल दीर्घाकार कुआँ किसी कब्र के लिये अनावश्यक भी है।

मुमताज के दफ़न की तारीख अविदित होना

मुमताज़ के दफ़न की तारीख इतिहास में कभी भी दर्ज नहीं की गई। यहाँ तक कि मुमताज़ की मृत्यु किस वर्ष हुई यह भी अज्ञात है। विभिन्न लोगों ने सन् 1629,1630, 1631 या 1632 में मुमताज़ की मौत होने का अनुमान लगाया है।

5000 औरतों वाली हरम में किस औरत की मौत कब हुई इसका हिसाब रखना एक कठिन कार्य है। स्पष्टतः मुमताज़ की मौत की तारीख़ महत्वहीन थी इसलिये उस पर ध्यान नहीं दिया गया। फिर उसके दफ़न के लिये ताज किसने बनवाया?

आगरा का ताजमहल दिखाओ, आगरा का ताजमहल वीडियो, आगरा का लाल किला, उस्ताद अहमद लाहौरी, ताज महल आगरा, ताज महल इतिहास, ताज महल का रहस्य, ताज महल किसने बनवाया था, ताज महल के बारे मे जानकारी, ताज महल क्या है, ताज महल पर निबंध, ताज महल फोटो, ताजमहल एक शिव मंदिर, ताजमहल का इतिहास, ताजमहल का फोटो, ताजमहल का सच, ताजमहल किसने बनवाया, ताजमहल दफ़नाए गए, ताजमहल पर निबंध, तेजो महालय शिव मंदिर,

आधारहीन प्रेमकथाएँ

शाहजहाँ और मुमताज़ के प्रेम की कहानियाँ मूर्खतापूर्ण हैं। न तो इन कहानियों का कोई ऐतिहासिक आधार है न ही उनके कल्पित प्रेम प्रसंग पर कोई पुस्तक ही लिखी गई है। ताज के शाहजहाँ के द्वारा अधिग्रहण के बाद उसके अधिपत्य दर्शाने के लिये ही इन कहानियों को गढ़ लिया गया।

भवन निर्माण शास्त्री

ताज भवन के भवननिर्माणशास्त्री (designer, architect) के विषय में भी अनेक नाम लिये जाते हैं जैसे कि ईसा इफेंडी जो कि एक तुर्क था, अहमद़ मेंहदी या एक फ्रांसीसी, आस्टीन डी बोरडीक्स या गेरोनिमो वेरेनियो जो कि एक इटालियन था, या शाहजहाँ स्वयं।

नदारद दस्तावेज़ ऐसा समझा जाता है कि शाहजहाँ के काल में ताजमहल को बनाने के लिये 20 हजार लोगों ने 22 साल तक काम किया। यदि यह सच है तो ताजमहल का नक्शा (design drawings), मज़दूरों की हाजिरी रजिस्टर (labour muster rolls), दैनिक खर्च (daily expenditure sheets), भवन निर्माण सामग्रियों के खरीदी के बिल और रसीद (bills and receipts of material ordered) आदि दस्तावेज़ शाही अभिलेखागार में उपलब्ध होते। वहाँ पर इस प्रकार के कागज का एक टुकड़ा भी नहीं है।

शाहजहाँ के समय में ताज के वाटिकाओं के विषय में किये गये वर्णनों में केतकी, जै, जूही, चम्पा, मौलश्री, हारश्रिंगार और बेल का जिक्र आता है। ये वे ही पौधे हैं जिनके फूलों या पत्तियों का उपयोग हिंदू देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना में होता है। भगवान शिव की पूजा में बेल पत्तियों का विशेष प्रयोग होता है। किसी कब्रगाह में केवल छायादार वृक्ष लगाये जाते हैं । ताज के वाटिकाओं में बेल तथा अन्य फूलों के पौधों की उपस्थिति सिद्ध करती है कि शाहजहाँ के हथियाने के पहले ताज एक शिव मंदिर हुआ करता था।

मोहम्मद पैगम्बर ने निर्देश दिये हैं कि कब्रगाह में केवल एक कब्र होना चाहिये और उसे कम से कम एक पत्थर से चिन्हित करना चाहिये। ताजमहल में एक कब्र तहखाने में और एक कब्र उसके ऊपर के मंज़िल के कक्ष में है तथा दोनों ही कब्रों को मुमताज़ का बताया जाता है, यह मोहम्मद पैगंबर के निर्देश की अवहेलना है। वास्तव में शाहजहाँ को इन दोनों स्थानों के शिवलिंगों को दबाने के लिये दो कब्र बनवाने पड़े थे।

हिंदू गुम्बज के सम्‍बन्‍ध मे तर्क

ताजमहल में ध्वनि को गुंजाने वाला गुम्बद है। ऐसा गुम्बज किसी कब्र के लिये होना एक विसंगति है क्योंकि कब्रगाह एक शांतिपूर्ण स्थान होता है। इसके विरुद्ध हिंदू मंदिरों के लिये गूंज उत्पन्न करने वाले गुम्बजों का होना अनिवार्य है क्योंकि वे देवी-देवता आरती के समय बजने वाले घंटियो, नगाड़ों आदि के ध्वनि के उल्लास और मधुरता को कई गुना अधिक कर देते हैं।

ताजमहल का गुम्बज कमल की आकृति से अलंकृत है। इस्लाम के गुम्बज अनालंकृत होते हैं, दिल्ली के चाणक्यपुरी में स्थित पाकिस्तानी दूतावास और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के गुम्बज उनके उदाहरण हैं। ताजमहल दक्षिणमुखी भवन है। यदि ताज का संबंध इस्लाम से होता तो उसका मुख पश्चिम की ओर होता।

सन् 1959 से 1962 के अंतराल में श्री एस.आर. राव, जब वे आगरा पुरातत्व विभाग के सुपरिन्टेन्डेंट हुआ करते थे, उनका ध्यान ताजमहल के मध्यवर्तीय अष्टकोणीय कक्ष के दीवार में एक चौड़ी दरार पर गया। उस दरार का पूरी तरह से अध्ययन करने के लिये जब दीवार की एक परत उखाड़ी गई तो संगमरमर की दो या तीन प्रतिमाएँ वहाँ से निकल कर गिर पड़ीं। इस बात को खामोशी के साथ छुपा दिया गया और प्रतिमाओं को फिर से वहीं दफ़न कर दिया गया जहाँ शाहजहाँ के आदेश से पहले दफ़न की गई थीं। इस बात की पुष्टि अनेक अन्य स्रोतों से हो चुकी है।

शाहजहाँ के पूर्व के ताज के संदर्भ

स्पष्टतः के केन्द्रीय भवन का इतिहास अत्यंत पेचीदा प्रतीत होता है। शायद महमूद गज़नी और उसके बाद के मुस्लिम प्रत्येक आक्रमणकारी ने लूट कर अपवित्र किया है परंतु हिंदुओं का इस पर पुनर्विजय के बाद पुनः भगवान शिव की प्रतिष्ठा करके इसकी पवित्रता को फिर से बरकरार कर दिया जाता था। शाहजहाँ अंतिम मुसलमान था जिसने तेजोमहालय उर्फ ताजमहल के पवित्रता को भ्रष्ट किया।

विंसेंट स्मिथ अपनी पुस्तक ‘Akbar the Great Moghul’ में लिखते हैं, “बाबर ने सन् 1630 आगरा के वाटिका वाले महल में अपने उपद्रवी जीवन से मुक्ति पाई”। वाटिका वाला वो महल यही ताजमहल था। बाबर की पुत्री गुलबदन ‘हुमायूँनामा’ नामक अपने ऐतिहासिक वृतांत में ताज का संदर्भ ‘रहस्य महल’ (Mystic House) के नाम से देती है।

बाबर स्वयं अपने संस्मरण में इब्राहिम लोधी के कब्ज़े में एक मध्यवर्ती अष्टकोणीय चारों कोणों में चार खम्भों वाली इमारत का जिक्र करता है जो कि ताज ही था। ये सारे संदर्भ ताज के शाहजहाँ से कम से कम सौ साल पहले का होने का संकेत देते हैं।

ताजमहल की सीमाएँ चारों ओर कई सौ गज की दूरी में फैली हुई है। नदी के पार ताज से जुड़ी अन्य भवनों, स्नान के घाटों और नौका घाटों के अवशेष हैं। विक्टोरिया गार्डन के बाहरी हिस्से में एक लंबी, सर्पीली, लताच्छादित प्राचीन दीवार है जो कि एक लाल पत्थरों से बनी अष्टकोणीय स्तंभ तक जाती है। इतने वस्तृत भूभाग को कब्रिस्तान का रूप दे दिया गया।

शाहजहाँ ने मुमताज़ से निकाह के पहले और बाद में भी कई और औरतों से निक़ाह किया था, अतः मुमताज़ को कोई ह़क नहीँ था कि उसके लिये आश्चर्यजनक कब्र बनवाया जावे। मुमताज़ का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था और उसमें ऐसा कोई विशेष योग्यता भी नहीं थी कि उसके लिये ताम-झाम वाला कब्र बनवाया जावे।

आगरा का ताजमहल दिखाओ, आगरा का ताजमहल वीडियो, आगरा का लाल किला, उस्ताद अहमद लाहौरी, ताज महल आगरा, ताज महल इतिहास, ताज महल का रहस्य, ताज महल किसने बनवाया था, ताज महल के बारे मे जानकारी, ताज महल क्या है, ताज महल पर निबंध, ताज महल फोटो, ताजमहल एक शिव मंदिर, ताजमहल का इतिहास, ताजमहल का फोटो, ताजमहल का सच, ताजमहल किसने बनवाया, ताजमहल दफ़नाए गए, ताजमहल पर निबंध, तेजो महालय शिव मंदिर,
ताज महल

शाहजहाँ तो केवल एक मौका ढूंढ रहा था कि कैसे अपने क्रूर सेना के साथ मंदिर पर हमला करके वहाँ की सारी दौलत हथिया ले, मुमताज़ को दफ़नाना तो एक बहाना मात्र था। इस बात की पुष्टि बादशाहनामा में की गई इस प्रविष्टि से होती है कि मुमताज़ की लाश को बुरहानपुर के कब्र से निकाल कर आगरा लाया गया और ‘अगले साल’ दफ़नाया गया। बादशाहनामा जैसे आधिकारिक दस्तावेज़ में सही तारीख के स्थान पर ‘अगले साल’ लिखने से ही जाहिर होता है कि शाहजहाँ दफ़न से संबंधित विवरण को छुपाना चाहता था।

विचार करने योग्य बात है कि जिस शाहजहाँ ने मुमताज़ के जीवनकाल में उसके लिये एक भी भवन नहीं बनवाया, मर जाने के बाद एक लाश के लिये आश्चर्यमय कब्र क्यों बनवाएगा|

एक विचारणीय बात यह भी है कि शाहजहाँ के बादशाह बनने के तो या तीन साल बाद ही मुमताज़ की मौत हो गई। तो क्या शाहजहाँ ने इन दो तीन साल के छोटे समय में ही इतना अधिक धन संचय कर लिया कि एक कब्र बनवाने में उसे उड़ा सके?

जहाँ इतिहास में शाहजहाँ के मुमताज़ के प्रति विशेष आसक्ति का कोई विवरण नहीं मिलता वहीं शाहजहाँ के अनेक औरतों के साथ, जिनमें दासी, औरत के आकार के पुतले, यहाँ तक कि उसकी स्वयं की बेटी जहांआरा भी शामिल है,उनके साथ यौन संबंधों का लेख जोखा मिलता है। क्या शाहजहाँ मुमताज़ की लाश पर अपनी गाढ़ी कमाई लुटाता?

सन् 1973 के आरंभ में जब ताज के सामने वाली वाटिका की खुदाई हुई तो वर्तमान फौवारों के लगभग छः फुट नीचे और भी फौवारे पाये गये। इससे दो बातें सिद्ध होती हैं। पहली तो यह कि जमीन के नीचे वाले फौवारे शाहजहाँ के काल से पहले ही मौजूद थे। दूसरी यह कि पहले से मौजूद फौवारे चूँकि ताज से जाकर मिले थे अतः ताज भी शाहजहाँ के काल से पहले ही से मौजूद था।

ताजमहल के ऊपरी मंज़िल के गौरवमय कक्षों से कई जगह से संगमरमर के पत्थर उखाड़ लिये गये थे जिनका उपयोग मुमताज़ के नकली कब्रों को बनाने के लिये किया गया। इसी कारण से ताज के भूतल के फर्श और दीवारों में लगे मूल्यवान संगमरमर के पत्थरों की तुलना में ऊपरी तल के कक्ष भद्दे, कुरूप और लूट का शिकार बने नजर आते हैं। चूँकि ताज के ऊपरी तलों के कक्षों में दर्शकों का प्रवेश वर्जित है, शाहजहाँ के द्वारा की गई ये बरबादी एक सुरक्षित रहस्य बन कर रह गई है। ऐसा कोई कारण नहीं है कि मुगलों के शासन काल की समाप्ति के 200 वर्षों से भी अधिक समय व्यतीत हो जाने के बाद भी शाहजहाँ के द्वारा ताज के ऊपरी कक्षों से संगमरमर की इस लूट को आज भी छुपाये रखा जावे।

आगरा का ताजमहल दिखाओ, आगरा का ताजमहल वीडियो, आगरा का लाल किला, उस्ताद अहमद लाहौरी, ताज महल आगरा, ताज महल इतिहास, ताज महल का रहस्य, ताज महल किसने बनवाया था, ताज महल के बारे मे जानकारी, ताज महल क्या है, ताज महल पर निबंध, ताज महल फोटो, ताजमहल एक शिव मंदिर, ताजमहल का इतिहास, ताजमहल का फोटो, ताजमहल का सच, ताजमहल किसने बनवाया, ताजमहल दफ़नाए गए, ताजमहल पर निबंध, तेजो महालय शिव मंदिर,
ताज महल

कुछ लोग विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि शाहजहाँ ने पूरे संसार के सर्वश्रेष्ठ भवन निर्माण शास्त्रियों से संपर्क करने के बाद उनमें से एक को चुना था। तो कुछ लोगों का यह विश्वास है कि उसने अपने ही एक भवननिर्माणशास्त्री को चुना था। यदि यह बातें सच होती तो शाहजहाँ के शाही दस्तावेज़ों में इमारत के नक्शों का पुलिंदा मिला होता। परंतु वहाँ तो नक्शे का एक टुकड़ा भी नहीं है। नक्शों का न मिलना भी इस बात का पक्का सबूत है कि ताज को शाहजहाँ ने नहीं बनवाया।

  • ताजमहल बड़े बड़े खंडहरों से घिरा हुआ है जो कि इस बात की ओर इशारा करती है कि वहाँ पर अनेक बार युद्ध हुये थे।
  • ताज के पश्चिमी छोर में लाल पत्थरों के अनेक उपभवन हैं जो कि एक कब्र के लिया अनावश्यक है।
  • संपूर्ण ताज में 400 से 500 कमरे हैं। कब्र जैसे स्थान में इतने सारे रहाइशी कमरों का होना समझ के बाहर की बात है।

ताज के पड़ोस के ताजगंज नामक नगरीय क्षेत्र का स्थूल सुरक्षा दीवार ताजमहल से लगा हुआ है। ये इस बात का स्पष्ट निशानी है कि तेजोमहालय नगरीय क्षेत्र का ही एक हिस्सा था। ताजगंज से एक सड़क सीधे ताजमहल तक आता है। ताजगंज द्वार ताजमहल के द्वार तथा उसके लाल पत्थरों से बनी अष्टकोणीय वाटिका के ठीक सीध में है|

आगरे के लाल किले के एक बरामदे में एक छोटा सा शीशा लगा हुआ है जिससे पूरा ताजमहल प्रतिबिंबित होता है। ऐसा कहा जाता है कि शाहजहाँ ने अपने जीवन के अंतिम आठ साल एक कैदी के रूप में इसी शीशे से ताजमहल को देखते हुये और मुमताज़ के नाम से आहें भरते हुये बिताया था।

ये सब झूठ है। सबसे पहले तो यह कि वृद्ध शाहजहाँ को उसके बेटे औरंगज़ेब ने लाल किले के तहखाने के भीतर कैद किया था न ऊपर के मंज़िल के बरामदे में। दूसरा यह कि उस छोटे से शीशे को सन् 1930 में इंशा अल्लाह ख़ान नामक पुरातत्व विभाग के एक चपरासी ने लगाया था केवल दर्शकों को यह दिखाने के लिये कि पुराने समय में लोग कैसे पूरे तेजोमहालय को एक छोटे से शीशे के टुकड़े में देख लिया करते थे। तीसरे, वृद्ध शाहज़हाँ, जिसके जोड़ों में दर्द और आँखों में मोतियाबिंद था घंटो गर्दन उठाये हुये कमजोर नजरों से उस शीशे में झाँकते रहने के काबिल ही नहीं था जब लाल किले से ताजमहल सीधे ही पूरा का पूरा दिखाई देता है तो छोटे से शीशे से केवल उसकी परछाईं को देखने की आवश्यकता भी नहीं है।

ताजमहल के गुम्बज में सैकड़ों लोहे के छल्ले लगे हुये हैं जिस पर बहुत ही कम लोगों का ध्यान जा पाता है। इन छल्लों पर मिट्टी के आलोकित दिये रखे जाते थे जिससे कि संपूर्ण मंदिर आलोकमय हो जाता था।

विद्यालयों और महाविद्यालयों में इतिहास की कक्षा में बताया जाता है कि शाहजहाँ का काल अमन और शांति का काल था तथा शाहजहाँ ने अनेकों भवनों का निर्माण किया और अनेक सत्कार्य किये जो कि पूर्णतः मनगढ़त और कपोल कल्पित हैं। जैसा कि इस ताजमहल प्रकरण में बताया जा चुका है, शाहजहाँ ने कभी भी कोई भवन नहीं बनाया उल्टे बने बनाये भवनों का नाश ही किया और अपनी सेना की 48 टुकड़ियों की सहायता से लगातार 30 वर्षों तक अत्याचार करता रहा जो कि सिद्ध करता है कि उसके काल में कभी भी अमन और शांति नहीं रही।

जहाँ मुमताज़ का कब्र बनी है उस गुम्बज के भीतरी छत में सुनहरे रंग में सूर्य और नाग के चित्र हैं। हिंदू योद्धा अपने आपको सूर्यवंशी कहते हैं अतः सूर्य का उनके लिये बहुत अधिक महत्व है जबकि मुसलमानों के लिये सूर्य का महत्व केवल एक शब्द से अधिक कुछ भी नहीं है। और नाग का संबंध भगवान शंकर के साथ हमेशा से ही रहा है।

इस्लाम का मुख्‍य काम भारत को लूटना मात्र था, उन्होने तत्कालीन मन्दिरो अपना निशाना बनया, । हिन्दू मंदिर उस समय अपने ऐश्वर्य के चरम पर रहे थे। इसी प्रकार आज का ताजमहल नाम से विख्यात तेजोमहाजय को भी अपना निशाना बनाया। मुस्लिम शासकों ने देश के हिंदू भवनों को मुस्लिम रूप देकर उन्हें बनवाने का श्रेय स्वयं ले लिया इस बात का ताज एक आदर्श उदाहरण है।

ताज महल के बारे में कुछ फैक्ट्स

आगरा का ताजमहल दिखाओ, आगरा का ताजमहल वीडियो, आगरा का लाल किला, उस्ताद अहमद लाहौरी, ताज महल आगरा, ताज महल इतिहास, ताज महल का रहस्य, ताज महल किसने बनवाया था, ताज महल के बारे मे जानकारी, ताज महल क्या है, ताज महल पर निबंध, ताज महल फोटो, ताजमहल एक शिव मंदिर, ताजमहल का इतिहास, ताजमहल का फोटो, ताजमहल का सच, ताजमहल किसने बनवाया, ताजमहल दफ़नाए गए, ताजमहल पर निबंध, तेजो महालय शिव मंदिर, दिल्ली का लाल किला, मुमताज महल का इतिहास, रहस्य फिल्म, सुल्तान शाह जहाँ बेगम ऑफ़ भोपाल, हुमायूँ का मकबरा दफ़नाए गए, हुमायूँ बच्चे,

ताज महल की इस संक्षिप्त कहानी का सारा श्रेय मूल लेखक श्री ओक साहब तथा अन्य प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से लगे सभी इतिहास प्रेमियों को जाता है और उन्हें जिन्होंने इस आर्टिकल को लिखने में अपरोक्ष रूप से मेरी सहयता की| वेबसाइट की notification on कर ले ताकि ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियाँ आपको मिलती रहे है|

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here